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हिसार, आदमपुर, नलवा, बालसमंद और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल तथा सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। राजस्थान के हिस्से के यमुना जल को भूमिगत पाइपलाइन से राजस्थान तक पहुंचाने की प्रस्तावित परियोजना में हरियाणा के लिए 280 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव जल संघर्ष समिति की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद आया है। समिति ने हरियाणा सरकार के समक्ष यह तर्क रखा था कि जब यह पाइपलाइन हरियाणा की सीमा से होकर गुजरेगी, तो राज्य के जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। सिंचाई विभाग द्वारा जारी पत्र में हरियाणा के लिए 280 क्यूसेक अतिरिक्त पानी का प्रस्ताव सामने आने से समिति द्वारा उठाए गए इस विषय को महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है। यह पानी हिसार और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा। संयुक्त सर्वे समिति के गठन का प्रस्ताव भेजा इसी क्रम में, किशनगढ़ ब्रांच–सिसवाला हेड लिंक (बालसमंद ब्रांच) नहर परियोजना को गति देने के उद्देश्य से भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जल संघर्ष समिति ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता को संयुक्त सर्वे समिति के गठन का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि परियोजना का सर्वे कार्य अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनभागीदारी आधारित बनाने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों तथा क्षेत्रीय प्रतिनिधियों को एक ही समिति में शामिल किया जाए। इससे सर्वे कार्य समयबद्ध, निष्पक्ष और बेहतर समन्वय के साथ पूरा हो सकेगा। समिति में इन अधिकारियों को शामिल करने का सुझाव प्रस्तावित समिति में सिंचाई विभाग की ओर से EIC कार्यालय के नामित अधिकारी, SC हिसार, XEN हिसार, SDO हिसार-1 एवं SDO आदमपुर को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। वहीं जल संघर्ष समिति की ओर से कुरड़ा राम नंबरदार प्रधान तथा अनिल लौरा, पारस लौरा, वीरेंद्र पूनिया, मोहन निठारवाल (सरसाना), दलबीर सिंह (भिवानी रोहिल्ला), प्रह्लाद (सुंडावास), तारिफ बसड़ा, चरण सिंह डोभी, पृथ्वी सिंह (खारिया), ओम गढ़वाल (बांडाहेड़ी) तथा दयानंद ढाका को सदस्य बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। समिति का उद्देश्य जल समाधान सुनिश्चित करना : पारस समिति के सदस्य पारस लौरा ने बताया कि समिति का उद्देश्य केवल मांग उठाना नहीं, बल्कि हिसार क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक जल समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पहले ही राजस्थान जाने वाली यमुना पाइपलाइन से हरियाणा के हिस्से के लिए भी पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा गया था और अब 280 क्यूसेक पानी का प्रस्ताव सामने आना क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार किशनगढ़ ब्रांच–सिसवाला हेड लिंक नहर परियोजना के लिए संयुक्त सर्वे समिति का प्रस्ताव भी परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। पारस लौरा ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि यमुना पाइपलाइन से 280 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तथा किशनगढ़ ब्रांच–सिसवाला हेड लिंक नहर परियोजना के लिए संयुक्त सर्वे समिति गठन का प्रस्ताव शीघ्र स्वीकृत होते हैं, तो हिसार, नलवा, आदमपुर, बालसमंद एवं आसपास के अनेक गांवों की पेयजल एवं सिंचाई संबंधी वर्षों पुरानी समस्या के स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि इन दोनों पहल से क्षेत्र के विकास, किसानों के हितों तथा भविष्य की जल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। किस गांव को कितना पानी देने का प्रस्ताव सिंचाई विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, हरियाणा के लिए दानोदा कलां (10 क्यूसेक), नयागांव (80 क्यूसेक), सिसवाला हेड (150 क्यूसेक) तथा पट्टन (40 क्यूसेक) पर टैपिंग पॉइंट प्रस्तावित किए गए हैं। इस प्रकार हरियाणा को कुल 280 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई है। विभाग ने इन सभी स्थानों को तकनीकी रूप से व्यवहार्य माना है तथा स्पष्ट किया है कि इन टैपिंग पॉइंट के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण अथवा नई लिंक नहर की आवश्यकता नहीं होगी। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद यह परियोजना हिसार क्षेत्र की भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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यमुना पाइपलाइन से हिसार को मिलेगा 280 क्यूसेक पानी:राजस्थान को जाने वाले जल में हरियाणा के लिए प्रस्ताव, संयुक्त सर्वे समिति गठन की मांग







