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मर्डर केस में आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत:3 साल से ज्यादा जेल में रहा, गवाहों या सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा,दूसरी बार याचिका लगाई




पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जीरकपुर के एक हत्या मामले में आरोपी रिंटू को नियमित जमानत दे दी है। यह आदेश जस्टिस सुमीत गोयल की एकल पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी 3 अप्रैल 2023 से लगातार न्यायिक हिरासत में है और अब तक करीब 3 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुका है, जबकि ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हो सका है। कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि मामले में कुल 14 गवाह बनाए गए हैं, लेकिन अब तक केवल 5 गवाहों की ही गवाही हो पाई है। ऐसे में ट्रायल के जल्द पूरा होने की संभावना कम नजर आ रही है। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी को बिना तय समय के लंबे समय तक जेल में रखना सही नहीं है, खासकर जब केस की सुनवाई में देरी हो रही हो। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी को मामले में झूठा फंसाया गया है और वह लंबे समय से हिरासत में है। वहीं राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह स्पष्ट किया कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता। दूसरी बार लगाई गई जमानत याचिका यह मामला 12 मार्च 2023 से जुड़ा है, जो थाना जीरकपुर में आईपीसी की धारा 302 और 34 के तहत दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता के भाई पर चाकू से कई बार वार कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।सरकारी पक्ष ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और इसमें आरोपी की मुख्य भूमिका है।
आरोपी की ओर से यह दूसरी नियमित जमानत याचिका दायर की गई थी। इससे पहले उसकी पहली जमानत याचिका 3 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वापस ले ली गई थी। इस बार बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष विस्तार से दलील देते हुए कहा कि आरोपी 3 अप्रैल 2023 से लगातार न्यायिक हिरासत में है और करीब तीन साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। इसके साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि मामले में ट्रायल की प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है, जिससे निकट भविष्य में सुनवाई पूरी होने की संभावना कम है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि लंबे समय तक अंडरट्रायल के रूप में जेल में रखना आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन है। इसलिए बदली हुई परिस्थितियों—यानी लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी—को आधार बनाते हुए इस बार जमानत देने की मांग की गई। वकील बोला झूठा फंसाया आरोपी के वकील आकाश खुरचा ने कोर्ट को बताया कि आरोपी 3 अप्रैल 2023 से लगातार जेल में है और उसे झूठा फंसाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी का नाम एक अन्य एफआईआर में 12 मार्च 2023 में भी आया था, जो थाना इंडस्ट्रियल एरिया, चंडीगढ़ में आईपीसी की धारा 392, 394, 397, 411 और 34 के तहत दर्ज थी। इस मामले में आरोपी पर 11 मार्च 2023 की रात 11:20 से 11:35 बजे के बीच स्नैचिंग की घटना में शामिल होने का आरोप था। वकील ने दलील दी कि जिस समय आरोपी को इस केस में हत्या का आरोपी बताया गया है, उसी समय वह दूसरे केस में भी शामिल दिखाया गया, जो विरोधाभास है। साथ ही यह भी बताया गया कि उक्त स्नैचिंग केस में आरोपी को चंडीगढ़ की सेशन कोर्ट ने 7 अप्रैल 2025 को बरी कर दिया है। इसके अलावा बचाव पक्ष ने कहा कि इस केस में अधिकतर निजी गवाहों की गवाही हो चुकी है और आरोपी 3 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुका है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। भाई की बेरहमी से हत्या का आरोप पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए डीएजी हेमंत अग्रवाल ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपी पर बहुत गंभीर आरोप हैं और उस पर शिकायतकर्ता के भाई की बेरहमी से हत्या करने का आरोप है। ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जा सकता है और केस की कार्रवाई पर असर पड़ सकता है। राज्य पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि आरोपों की प्रकृति अत्यंत गंभीर है, इसलिए आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही यह आशंका भी जताई गई कि जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इस दौरान राज्य की ओर से 26 अप्रैल 2026 की कस्टडी सर्टिफिकेट भी कोर्ट में पेश की गई, जिसमें बताया गया कि आरोपी कब से जेल में है और कितने समय से हिरासत में है, ताकि कोर्ट जमानत पर फैसला लेते समय इन बातों को ध्यान में रख सके। आरोपी 3 अप्रैल 2023 से जेल में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिकॉर्ड देखा और पाया कि आरोपी 3 अप्रैल 2023 से जेल में है, यानी करीब 3 साल से ज्यादा समय बीत चुका है। पुलिस ने 21 जून 2023 को चालान भी पेश कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हो सका। मामले में कुल 14 गवाह हैं, जिनमें से अब तक सिर्फ 5 गवाहों की ही गवाही हो पाई है और 1 गवाह को छोड़ दिया गया है। इससे साफ है कि केस अभी लंबा चल सकता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले जावेद गुलाम नवी शेख बनाम महाराष्ट्र राज्य (2024) का हवाला देते हुए कहा कि हर आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जल्दी सुनवाई का अधिकार है। अगर ट्रायल समय पर पूरा नहीं हो रहा, तो सिर्फ यह कहकर जमानत नहीं रोकी जा सकती कि आरोप गंभीर हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर आरोपी के खिलाफ दूसरे केस भी हैं, तो सिर्फ उसी आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता। इस केस के तथ्यों को देखकर ही फैसला लिया जाएगा।



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