सोनीपत में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के आह्वान पर भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के विरोध में बुधवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन किए गए। इसी कड़ी में सोनीपत के झरोठी टोल प्लाजा पर किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को व्यापार समझौते में शामिल किया गया तो इसका सीधा नुकसान देश के करोड़ों किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ेगा। किसानों ने जताई कृषि क्षेत्र पर खतरे की आशंका प्रदर्शन का नेतृत्व जिला प्रधान बेदी दहिया, प्रदेश सचिव वीरेंद्र खोखर, गोहाना ब्लॉक प्रधान राजबीर माजरा, युवा जिला प्रधान प्रवीण दहिया सहित कई किसान नेताओं ने किया। अभिमन्यु कुहाड़ किसान नेता ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है, जबकि अमेरिका की कृषि व्यवस्था बड़े कॉर्पोरेट ढांचे, आधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी पर आधारित है। ऐसे में दोनों देशों के किसानों के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा भारतीय किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगी। डेयरी, पोल्ट्री और पशुपालन पर पड़ सकता है असर
किसान नेताओं ने कहा कि यदि अमेरिकी कृषि, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों को कम शुल्क या शुल्क मुक्त भारत में प्रवेश मिलता है तो देश के करोड़ों छोटे किसानों, पशुपालकों और डेयरी उत्पादकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उनका कहना था कि सस्ते आयातित उत्पाद घरेलू बाजार में कीमतों को प्रभावित करेंगे, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर चिंता मोर्चा नेताओं ने दावा किया कि ऐसे समझौते से कृषि आधारित रोजगार, ग्रामीण उद्योग और सहायक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। साथ ही खाद्य सुरक्षा और खाद्य संप्रभुता पर भी खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि देश आवश्यक खाद्य उत्पादों के लिए आयात पर अधिक निर्भर हो जाएगा। किसानों ने विदेशी कंपनियों के बढ़ते प्रभाव और संभावित कृषि व्यापार घाटे को लेकर भी चिंता व्यक्त की। सरकार के सामने रखीं सात प्रमुख मांगें संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित उत्पादों को पूरी तरह बाहर रखा जाए। साथ ही किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), सार्वजनिक खरीद प्रणाली और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी नीतियों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करने की भी मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कृषि क्षेत्र की सुरक्षा और किसानों की आजीविका को व्यापारिक हितों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का प्रदर्शन:सोनीपत में फूंके मोदी- ट्रंप के पुतले; कृषि, पोल्ट्री और डेयरी क्षेत्र को बाहर रखने की मांग
