फाजिल्का क्षेत्र में हुई तेज बरसात एक गरीब परिवार के लिए आफत बनकर बरसी है। गांव लक्खे के उताड़ में बारिश के कारण एक बेहद गरीब व्यक्ति के मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में पीड़ित परिवार की गृहस्थी का सारा सामान मलबे के नीचे दबकर पूरी तरह नष्ट हो गया है। पीड़ित ने प्रशासन और समाज से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। बाल-बाल बची जान, मलबे में बदला आशियाना पीड़ित जत्थेदार मलकीत सिंह ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि हादसे के समय तेज बरसात हो रही थी और वह घर के भीतर सो रहे थे। जैसे ही बरसात थमी, वह किसी काम से घर से बाहर निकले। उनके बाहर निकलते ही पीछे से अचानक एक जोरदार धमाके की आवाज आई। जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके मकान की छत पूरी तरह ढह चुकी थी। मलकीत सिंह की जान तो बाल-बाल बच गई, लेकिन उनका आशियाना उजड़ गया। इस हादसे ने पीड़ित को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है।
मलबे में दबा राशन और किश्तों पर लिया सामान मलकीत सिंह ने रुआंसे होते हुए बताया कि घर में रखा बेड, अलमारी और सारा घरेलू सामान मलबे के नीचे दबकर टूट गया है। रोटी-पानी बनाने के लिए घर में एक बर्तन तक साबुत नहीं बचा है। भीषण गर्मी से बचने के लिए उन्होंने हाल ही में किश्तों पर एक कूलर खरीदा था, वह भी इस मलबे में दबकर चकनाचूर हो गया।
मजदूरी के सीजन में टूटा उम्मीदों का पहाड़ मलकीत सिंह ने बताया कि वह एक स्थानीय चौकीदार के रूप में काम करते हैं, जिससे उन्हें महज 6,000 रुपये प्रति महीना तनख्वाह मिलती है। इतनी कम रकम में परिवार का गुजारा मुश्किल से होता है। इन दिनों क्षेत्र में धान की बिजाई का सीजन चल रहा था, और उन्हें उम्मीद थी कि अतिरिक्त मजदूरी करके वे कुछ पैसे कमा लेंगे। लेकिन इस अप्रत्याशित हादसे ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पीडि़त ने लगाई मदद की गुहार: पीड़ित मलकीत सिंह के पास अब सिर छुपाने की जगह भी नहीं बची है। उन्होंने जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दानी सज्जनों से इस संकट की घड़ी में तुरंत आर्थिक सहायता और तिरपाल आदि मुहैया कराने की मांग की है, ताकि वह अपने परिवार को संभाल सकें।
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फाजिल्का में बारिश से छत गिरी, बाल-बाल बचा परिवार:घर से आते ही हादसा, मात्र 6000 रुपए वेतन, किश्तों में लिया सामान मलबे में तब्दील
