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फाजिल्का जीरो लाइन पर वार्षिक मेला लगा:भारतीय श्रद्धालुओं ने किया सजदा, पाकिस्तान के लोग सीमा पार से ही कर पाए दर्शन




भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल करीब स्थित फाजिल्का के अंतिम छोर के गांव गुलाबा भैणी में विभाजन से पूर्व स्थापित पीर बाबा बुर्जी वाला की ऐतिहासिक दरगाह पर वार्षिक मेला श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। सरहद की जीरो लाइन पर स्थित यह अनूठी मजार दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों को मजबूत करने और पुरानी सांस्कृतिक विरासत को जिंदा रखने का एक बड़ा प्रतीक है। मेले में भारी संख्या में भारतीय श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पीर बाबा की समाधि पर माथा टेका और मन्नतें मांगीं। एक तरफ जहाँ कड़े सुरक्षा इंतजाम थे, वहीं दूसरी तरफ मेले में बच्चों के झूले और खान-पान के विभिन्न स्टॉल हर वर्ष की तरह इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्होंने मेले की शोभा को दोगुना कर दिया।
आस्था के बीच खड़ी हुई सरहद की दीवार, पाक श्रद्धालुओं ने दूर से किया सजदा यह मेला दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के निकट लाता है और अमन-शांति का संदेश देता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच खिंची सरहद की मजबूत दीवार के चलते इस बार भी पाकिस्तान से आने वाले श्रद्धालु मजार के अंदर तक नहीं पहुंच पाए। आस्था और सरहद की इस स्थिति को बयां
बीएसएफ और पंजाब पुलिस की कड़ी सुरक्षा, गर्मी में लगाई छबील जीरो लाइन पर स्थित होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां इस आयोजन को लेकर पूरी तरह सतर्क रहीं: भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) की कड़ी सुरक्षा और पैनी नजर के बीच मेले का आयोजन हुआ। हर श्रद्धालु की बारीकी से जांच करने के बाद ही उन्हें सीमा के नजदीक बाबा की मजार पर जाने की अनुमति दी गई। बीएसएफ की मानवीय पहल भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए बीएसएफ के जवानों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठंडे-मीठे पानी की छबील (लंगर) लगाई गई, जिसने सुरक्षा बलों के मानवीय चेहरे को पेश किया। मौके पर पहुंचे डीएसपी बी.एस. रंधावा ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर पंजाब पुलिस बल को भी क्षेत्र में तैनात किया गया है। उन्होंने भी पुष्टि की कि इस बार पाकिस्तान की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती पिछले समय के मुकाबले कम देखने को मिली है।
तश्वीरों से मेले का आकर्षण



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