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फरीदाबाद नगर निगम की फाइनेंस कमेटी के सदस्य नियुक्त:कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने लिया फैसला, जारी किए गए ऑर्डर




फरीदाबाद नगर निगम में पिछले एक साल से अधिक समय से फाइनेंस कमेटी के गठन को लेकर चल रहा राजनीतिक गतिरोध तथा मामले के न्यायालय तक पहुंचने के बाद हरियाणा सरकार को स्वयं हस्तक्षेप करते हुए फाइनेंस कमेटी के लिए सदस्यों का चयन करना पड़ा। गुरुवार को सरकार ने वार्ड-16 के पार्षद मनोज नासवा और वार्ड-44 के पार्षद प्रदीप टोंगर को फाइनेंस कमेटी का सदस्य नियुक्त कर दिया। नगर निगम चुनाव हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन राजनीतिक खींचतान के कारण फाइनेंस कमेटी का गठन नहीं हो पा रहा था। यह कमेटी निगम के वित्तीय फैसलों और विकास कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कमेटी के गठन में लगातार हो रही देरी के कारण निगम के कई महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हो रहे थे। कोर्ट ने तलब की थी रिपोर्ट बताया जाता है कि कमेटी में अपने-अपने समर्थक पार्षदों को शामिल कराने को लेकर राजनीतिक स्तर पर सहमति नहीं बन पा रही थी। इसी बीच मामला कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने भी इस विषय पर गंभीरता दिखाई। इसके बाद सरकार ने नगर निगम प्रशासन, मेयर और संबंधित पक्षों से रिपोर्ट तलब की थी। करीब 15 दिन पहले सरकार ने मेयर प्रवीण जोशी और पार्षदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि आखिर अभी तक फाइनेंस कमेटी का गठन क्यों नहीं किया गया। सभी पक्षों से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया था। प्राप्त जवाबों और रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने स्वयं निर्णय लेते हुए दोनों पार्षदों की नियुक्ति कर दी। यहां देखें आदेश की कॉपी दोनों पार्षद कमेटी में हुए नामित फाइनेंस कमेटी में अब मेयर, नगर निगम आयुक्त और दोनों नामित पार्षद शामिल होंगे। इस प्रकार चार सदस्यीय कमेटी का गठन पूरा हो गया है। माना जा रहा है कि कमेटी के गठन से रुके हुए वित्तीय प्रस्तावों और विकास कार्यों को गति मिलेगी। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नियुक्त किए गए दोनों पार्षद कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के समर्थक माने जाते हैं। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर टिकी हैं, जिसकी घोषणा सरकार कभी भी कर सकती है। नगर निगम चुनाव मार्च 2025 में हुए थे और पहली बार सीधे मतदान के जरिए प्रवीण जोशी मेयर चुनी गई थीं। इसके बावजूद एक वर्ष तक फाइनेंस कमेटी का गठन नहीं हो सका। अब सरकार के हस्तक्षेप के बाद यह प्रक्रिया पूरी हुई है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर भी फैसला हो जाएगा।



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