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पूर्व सीएम भजन लाल पर टिप्पणी से सियासत गर्म:हिसार में सांसद रेखा शर्मा के खिलाफ विश्नोई सामाज ने थाने में दी शिकायत




रियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन के खिलाफ कथित विवादित टिप्पणी करना भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा को भारी पड़ रहा है। बिश्नोई समाज और कुलदीप बिश्नोई के समर्थकों ने सांसद के खिलाफ आदमपुर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। समाज का आरोप है कि सांसद ने जानबूझकर राजनीतिक द्वेष के चलते अपमानजनक बयानबाजी की है। इससे उनकी भावानाओं को ठेंस पहुंची है। उन्होंने सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आदमपुर थाना पुलिस को दी गई शिकायत में बिश्नोई समाज ने सांसद के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इसने हरियाणा की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि कुलदीप बिश्नोई और रेखा शर्मा दोनों ही सत्ताधारी भाजपा से जुड़े हुए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और भाजपा नेतृत्व इस अंदरूनी खींचतान को कैसे संभालता है। क्या था विवादित बयान, जिससे बढ़ा विवाद शिकायतकर्ताओं के अनुसार, 24 अप्रैल को पंचकूला में नगर निगम चुनाव के दौरान आयोजित एक जनसभा में सांसद रेखा शर्मा ने चौधरी भजनलाल और चंद्रमोहन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि ये नेता “बदमाशी करके चुनाव जीतते” रहे हैं। इस बयान के वायरल होने के बाद से ही बिश्नोई समाज और भजनलाल परिवार के समर्थकों में गहरी नाराजगी है। माफी की डेडलाइन खत्म, अब कानूनी लड़ाई मामले को लेकर हिसार में बिश्नोई सभा की एक विशेष पंचायत आयोजित की गई थी। पंचायत ने रेखा शर्मा को अपनी टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए 5 दिन का समय दिया था। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि समय सीमा समाप्त होने के बावजूद सांसद की ओर से कोई स्पष्टीकरण या माफी नहीं आई, जिसके बाद अब कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया है। धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप शिकायत में उल्लेख किया गया है कि चौधरी भजनलाल केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि 36 बिरादरी के सम्मानित जननायक रहे हैं। समाज के लोगों ने कहा उनके खिलाफ ऐसी टिप्पणी करना करोड़ों समर्थकों की राजनीतिक और सामाजिक भावनाओं को आहत करने वाला है। मर्यादा का उल्लंघन: बिश्नोई समाज के 21 नियमों के अनुसार किसी की निंदा करना धर्म विरुद्ध है, इसलिए सांसद का बयान मर्यादा के खिलाफ है। आरोप लगाया गया है कि सांसद ने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए ऐसे बेबुनियाद बयान दिए हैं।



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