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पानीपत जिले के गांव नौल्था में बीपीएल परिवारों को प्लॉट दिलाने की प्रशासन की दूसरी कोशिश भी नाकाम रही। शुक्रवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट और प्रशासनिक टीम प्लॉटों पर कब्जा दिलाने पहुंची थी, लेकिन किसानों ने हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने का हवाला देते हुए कार्रवाई रुकवा दी। यह मामला 2008 का है, जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान नौल्था के 462 बीपीएल परिवारों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉट आवंटित किए गए थे। इन प्लॉटों की रजिस्ट्री भी परिवारों को दे दी गई थी। हालांकि, उस समय की पंचायत ने ये प्लॉट शामलात की ऐसी जमीन में काटे थे, जो पहले से ही विवादित थी। रजिस्ट्री के बावजूद नहीं मिला प्लॉटों पर कब्जा रजिस्ट्री मिलने के बावजूद गरीब परिवारों को इन प्लॉटों का कब्जा कभी नहीं मिल पाया। पिछली पंचायतों ने भी कब्जा दिलाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं। अब भाजपा सरकार में जिला उपायुक्त के आदेश पर ग्राम पंचायत के दोनों सरपंचों ने फिर से प्लॉट दिलाने का प्रयास किया था। ग्राम पंचायत नौल्था ने जिला उपायुक्त को एक आवेदन दिया था, जबकि उन्हें पता था कि इस जमीन पर हाईकोर्ट में मामला चल रहा है। उपायुक्त के आदेश पर कृषि विभाग के शमशेर सिंह मलिक को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। शुक्रवार को वे प्रशासन की टीम और जेसीबी के साथ मौके पर पहुंचे। किसानों ने रुकवाया काम जब खाली जमीन पर जेसीबी चलाने की तैयारी हुई, तो किसान मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि यह मामला हाईकोर्ट में है और जब तक फैसला नहीं आता, कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। किसानों ने हाईकोर्ट के संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। हाईकोर्ट के कागजात देखने के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट शमशेर मलिक वापस लौट गए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दी जाएगी और कानून सभी के लिए समान है।
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पानीपत में बीपीएल परिवारों को प्लॉट नहीं मिले:कब्जा दिलाने पहुंची टीम, किसानों ने वापस लौटाया, बोले- हाईकोर्ट में चल रहा केस







