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पानीपत में कुकर्मी को 20 साल की सजा:कोर्ट ने ₹56 हजार का लगाया जुर्माना; 10 साल के बच्चे से की थी वारदात




पानीपत की विशेष अदालत (पॉक्सो कोर्ट) ने 10 वर्षीय बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौन शोषण (कुकर्म) करने के एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी रविंद्र उर्फ संदीप को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर कुल 56 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को अतिरिक्त सजा काटनी होगी। पूरा मामला 4 फरवरी 2024 का है। किला थाना पुलिस के अंतर्गत आने वाले गांव राजाखेड़ी निवासी हरिंद्र सिंह ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उनके 10 वर्षीय बेटे को गांव का ही रहने वाला आरोपी रविंद्र उर्फ संदीप बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बैठाकर खेतों में ले गया था। शाम करीब 7 बजे अंधेरा होने के बाद खेतों में एक ट्यूबवेल के पास बने ईंटों के चट्टे के नजदीक आरोपी ने बच्चे के साथ जबरन कुकर्म की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी ने बच्चे को बुरी तरह डराया और धमकाया कि यदि उसने इस बारे में घर पर किसी को कुछ भी बताया, तो वह उसे जान से मार देगा। घर लौटने पर जब बच्चे की हालत बिगड़ी तो उसने परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद थाना किला में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने मोटरसाइकिल की बरामद, 16 गवाहों के आधार पर तय हुआ दोष मामले की जांच के दौरान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी रविंद्र को गिरफ्तार किया था। आरोपी ने पुलिस हिरासत में बिना किसी डर या दबाव के अपना जुर्म कबूल किया था और उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक को उसके रिहायशी मकान से बरामद किया गया था। इस मामले की पैरवी के दौरान अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) की तरफ से अदालत के समक्ष कुल 16 गवाहों और पुख्ता फॉरेंसिक व मेडिकल साक्ष्य पेश किए गए, जिनके आधार पर आरोपी का दोष पूरी तरह सिद्ध हो गया। विभिन्न धाराओं के तहत मिली अलग-अलग सजा अदालत ने मामले को बेहद संवेदनशील और जघन्य मानते हुए दोषी रविंद्र को ये सजा और जुर्माना सुनाया है। पॉक्सो एक्ट (6 POCSO Act): 20 वर्ष की कठोर कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माना। धारा 377 आईपीसी (अप्राकृतिक संबंध): 10 वर्ष की जेल और 20 हजार रुपए जुर्माना। धारा 363 आईपीसी (अपहरण): 3 वर्ष की जेल और 10 हाजर रुपए जुर्माना। धारा 323 आईपीसी (मारपीट): 1 वर्ष की जेल और 1,000 रुपए जुर्माना। अदालत के आदेशानुसार यह सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिसके तहत दोषी को अधिकतम 20 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने होंगे।



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