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पाकिस्तानी डंकर खाने में देता था गाय का मांस:कुरुक्षेत्र के युवक ने बेलारूस में काटी 7 महीने जेल, आर्मी ने मार-पीटकर बॉर्डर पार फेंका




बेलारूस के जंगल में पाकिस्तानी डंकर खाने के लिए ब्रेड के साथ गाय के मांस (बीफ) का टुकड़ा देते थे। हालांकि हिंदू होने के नाते वे ब्रेड खाकर अपना गुजारा करते थे। उनको सिर्फ इतना खाना मिलता था, जिसमें उनकी जान ना निकले। बेलारूस के जंगल में बीते उनके 10 दिन किसी नरक से कम नहीं थे। लेकिन किस्मत ने उनको दूसरी बार फिर उसी जंगल और डंकर के सामने लाकर पटक दिया। लातविया की आर्मी से बुरी तरह से पिटकर वे 3-4 दिन पैदल चलकर डंकर तक पहुंचे। इस बार फिर डंकर ने उनको फिर से धोखा दिया और उनको मिन्स्क शहर में छोड़कर पुलिस से पकड़वा दिया। 7 महीने जेल काटकर लौटा रोहित हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के रहने वाले रोहित ने आपबीती सुनाई, तो पास के सोफे पर बैठे उसके पिता मनोज कुमार की आंखें भर आईं। पिहोवा के फौजी प्लॉट का रोहित करीब 7 महीने बेलारूस की जेल काटकर अपने घर लौटा था। रोहित अच्छे भविष्य की तलाश में पिछले साल अक्टूबर को मोल्दोवा (यूरोप) गया था। एजेंट ने दिया धोखा- रोहित रोहित ने बताया कि पिहोवा की पूजा कॉलोनी के एजेंट विजय शर्मा ने उसे 9 लाख रुपए में सीधे मोल्दोवा भेजने का भरोसा दिया। लेकिन आरोपी एजेंट ने धोखा देते हुए उसे पहले दुबई भेज दिया। यहां एजेंट के डंकर ने उसे अपने पास 2 दिन रखा। इसके बदले आरोपी ने उससे 500 दिरहम चार्ज कर लिया। दुबई से भेजा रूस एजेंट ने उसके साथ पिहोवा के एक और युवक को भेजा था। दो दिन के बाद एजेंट के डंकर ने उनको दुबई एयरपोर्ट पर छोड़ दिया। यहां फ्लाइट से कुछ समय पहले ही आरोपी ने उसके साथी युवक के मोबाइल पर रूस का वीजा भेजा। किसी तरह वे फ्लाइट लेने में कामयाब रहे और रूस पहुंच गए। टैक्सी से पहुंचाया बेलारूस, डॉलर छीने रूस की राजधानी मॉस्को से उनको पाकिस्तानी डंकर भुट्टर अपने साथ टैक्सी में बेलारूस ले गया। भुट्टर उनको जंगल में अपने ठिकाने पर ले गया। यहां जाते ही भुट्टर ने उससे टैक्सी का किराया देने के नाम पर 400 यूएस डॉलर लिए। फिर अपने पास रोकने के लिए उसने बचे हुए 800 डॉलर भी छीन लिए। यहीं से उनका टॉर्चर शुरू हो गया। फिर शुरू हुआ टॉर्चर यहां भुट्टर ने उनको दो दिन कुछ अच्छा खाना दिया, लेकिन दो दिन बाद उसने पैसे मांगने शुरू कर दिए। यहां उनके साथ और 10-15 युवक थे। एजेंट से पैसे नहीं मिलने पर भुट्टर उनको डराने-धमकाने लगा। भुट्टर अपने साथ बटन वाला बड़ा चाकू रखता था। पैसे नहीं मिलने पर उसने उनको खाना कम कर दिया। साथ ही उनको कमरे से निकाल कर तंबू में भेज दिया। माइनस 4 डिग्री में रखा बेलारूस में रात को तापमान माइनस 4 डिग्री तक चला जाता था। तंबू में उनको ओढ़ने के लिए कोई कंबल तक नहीं दिया। अब भुट्टर ने उनको खाना देना भी बंद कर दिया। वो उनके पास चाकू लेकर आता और बाल खींचकर पैसे की डिमांड करता था। भुट्टर उनको धमकाता था कि उनको यहां रखने में उसका काफी खर्च हो रहा है। पैसे नहीं मिलने पर तंबू से बाहर निकाला भुट्टर उनको सिर्फ जिंदा रखने के लिए ब्रेड और पैकेट में गाय का मांस देता था। उनको दो दिन में सिर्फ दोपहर के समय ये खाना दिया गया। उनको पता चला कि उनको खाने के लिए गाय का मांस दिया गया है, तो उसने खाने से मना कर दिया और ब्रेड खाकर अपना गुजारा किया। डंकर को पैसा नहीं मिला तो उसने उसे और उसके साथी को तंबू से बाहर निकाल दिया। घर वीडियो कॉल करके मंगवाए पैसे तब उसने अपने साथी के साथ वीडियो बनाकर घर भेजी, जिसके बाद परिवार ने एजेंट से बातचीत की। उसी दिन आरोपी एजेंट विजय उसके पिता से करीब साढ़े 5 लाख रुपए कैश लेकर चला गया, लेकिन एजेंट ने पैसे डंकर भुट्टर तक नहीं पहुंचाए। तब भुट्टर ने उनको मारकर जंगल में फेंकने की धमकी दी। भाई ने भेजे 900 डॉलर पैसे नहीं आए तो भुट्टर ने उसके साथ मारपीट की। तब उसके भाई ने भुट्टर से बात करके उसके पास 900 डॉलर भेजे। भुट्टर के पास 8 लोगों के पैसे आए तो भुट्टर उनको बेलारूस से लातविया बॉर्डर लेकर चला गया। आरोपी ने उनको बॉर्डर पर छोड़ा और बॉर्डर पार करवा दिया। आर्मी ने पकड़कर पीटा यहां बॉर्डर पार करते ही उनको लातविया की आर्मी ने पकड़ लिया। आरोप लगाया कि आर्मी ने उसका मोबाइल तोड़कर सभी के मोबाइल तोड़ दिए और सिर झुकाकर 2 घंटे तक बैठाकर रखा। उसके बाद आर्मी ने उनके साथ मारपीट की और वेन में बैठा दिया। साथ ही धमकी दी कि सिर ऊपर किया तो जान से मार देंगे। 100 किलोमीटर दूर लेकर गए लातविया की आर्मी उनको बॉर्डर से करीब 100 किलोमीटर दूर ले गई। दो घंटे तक उनको सिर नीचे करके ही बैठना पड़ा। यहां आर्मी ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी। मारपीट के साथ उनको करंट के झटके दिए गए। इसके बाद उनको बॉर्डर के पार फेंक दिया और दोबारा आने पर गोली मारने की धमकी दी।
किस्मत ने फिर भुट्टर के पास पहुंचाया यहां 2 घंटे भटकने के बाद उसने भुट्टर को कॉल किया, लेकिन भुट्टर उनको लेने नहीं आया। 3-4 दिन के सफर के बाद वे दोबारा भुट्टर के ठिकाने पर पहुंचे। भुट्टर ने उनको खाने के लिए फिर से ब्रेड और गाय का मांस दिया और दो दिन बाद दोबारा बॉर्डर पार करवाने की धमकी दी। भुट्टर बोला, खर्चा काफी हो गया, बॉर्डर पार जाना ही होगा दो दिन बाद भुट्टर उनके पास फिर से आया और बोला कि मेरा काफी खर्चा हो गया है। मुझे तुमको बॉर्डर पार लेकर जाना है, लेकिन उन्होंने भुट्टर से वापस इंडिया जाने की बात कही। इस पर भुट्टर ने उनसे फिर से पैसे की डिमांड की। सबके पैसे आने के बाद भुट्टर उनको वापस छोड़ने पर राजी हो गया। मिन्स्क शहर में छोड़कर पुलिस को बुलाया डंकर भुट्टर उसे और उसके दोस्त को सुबह के समय मिन्स्क शहर ले आया। यहां एक जगह पर उनको छोड़ दिया और कुछ देर बाद आने की बात कही, लेकिन भुट्टर ने उनको पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस उनको पकड़कर ले गई और पूछताछ की। बाद में उनको कोर्ट के ऑर्डर पर जेल में डाल दिया। 7 महीने जेल में रहना पड़ा जेल में उनको एक छोटी-सी जगह से खाना दिया जाता था, लेकिन पूरा दिन उनको सेल में बंद रहना पड़ता था। हालांकि जेल में उनको 10-15 दिन बाद अपने घर बात करने की छूट मिली। करीब 7 महीने के बाद इंडियन एंबेसी की मदद से उनका इमरजेंसी पासपोर्ट बना और परिवार ने उनकी टिकट भेजकर वापस बुला लिया। SP से करेंगे सख्त कार्रवाई की मांग- मनोज कुमार रोहित के पिता मनोज कुमार ने बताया कि आरोपी एजेंट विजय के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर SP से मिलेंगे। आरोपी ने रोहित को सीधा मोल्दोवा भेजने की बजाय डंकी रूट से बेलारूस तक भेजा। इसके एवज में आरोपी ने उनसे करीब 11 लाख रुपए ठग लिए। साथ ही उसके बेटे को जेल तक जाना पड़ा। किराए के मकान में रह रहा परिवार रोहित का परिवार फौजी प्लॉट में किराए के मकान में रहता है। उसके पिता मनोज कुमार टैक्सी चलाते हैं। उसके पिता ने अपना प्लॉट बेचकर और कुछ रुपए उधार लेकर रोहित को विदेश भेजने की कोशिश की थी।



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