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पठानकोट में कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर लटके ताले:पंजाब सरकार के आदेश हवा; 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के फॉर्म भरने पहुंचे लाभार्थी परेशान




पंजाब सरकार द्वारा 18 जून को राज्य में घोषित सरकारी अवकाश के बावजूद महिलाओं के लिए शुरू की गई ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के फॉर्म भरने के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को विशेष तौर पर खुला रखने के सख्त निर्देश दिए गए थे। सरकार ने बाकायदा अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया था कि छुट्टी वाले दिन भी आवेदन प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। हालांकि जब इस जनहित योजना की जमीनी हकीकत जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने विभिन्न वार्डों का औचक दौरा किया तो दावों और हकीकत में बड़ा अंतर देखने को मिला। कहीं केंद्र खुले थे और काम चल रहा था, तो कहीं ताले लटके होने के कारण दूर-दराज से आए लाभार्थी भीषण गर्मी में परेशान होते नजर आए। अमरूदां वाली झुग्गियां में केंद्र पर लटका मिला ताला
जब भास्कर टीम जमीनी स्थिति का जायजा लेने एक अमरूदां वाली झुग्गियां के आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। केंद्र पूरी तरह बंद था और वहां किसी भी तरह की गतिविधि दिखाई नहीं दी। योजना की जानकारी लेने और फॉर्म भरने आई कई महिलाएं केंद्र के बाहर इंतजार कर रही थीं। इस अव्यवस्था पर जब टीम ने संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रवेश से बात की, तो उन्होंने एक नया ही दावा पेश कर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र दोपहर 2 बजे तक ही संचालित होता है। जब उनसे सरकार के आदेशानुसार ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के फॉर्म न भरे जाने और केंद्र बंद होने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने अजीबोगरीब बहाना बनाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता किसी काम से चंडीगढ़ गए हुए हैं और योजना के मुख्य फॉर्म उन्हीं के पास हैं, जिस वजह से यहां फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके। दूसरे दिन भी नहीं मिले फॉर्म
प्रशासनिक दावों की पोल तब खुली जब भास्कर टीम ने लगातार दूसरे दिन भी उसी प्रभावित मौके का दौरा किया। हैरानी की बात यह रही कि दूसरे दिन भी केंद्र पर फॉर्म उपलब्ध नहीं थे। इस गंभीर लापरवाही के कारण लाभार्थियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। दिनभर कई गरीब और जरूरतमंद महिलाएं कड़कती धूप में जानकारी लेने और फॉर्म भरने के लिए चक्कर काटती रहीं, लेकिन उन्हें निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ा। इंदिरा कॉलोनी में मुस्तैद दिखे कर्मचारी
इस बदइंतजामी के विपरीत, जब टीम ने शहर के इंदिरा कॉलोनी का रुख किया, तो वहां की तस्वीर बिल्कुल जुदा थी। सरकार के आदेशों का पालन करते हुए वहां आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह खुला था। केंद्र के अंदर ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के फॉर्म वितरित किए जा रहे थे। तैनात स्टाफ मुस्तैदी से महिलाओं के दस्तावेज जांच कर मौके पर ही फॉर्म भरने की प्रक्रिया को पूरा कर रहा था।
एक ही शहर के दो अलग-अलग वार्डों में दिखी इस विरोधाभासी स्थिति ने प्रशासनिक तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फोन मिलाने पर भी अधिकारियों ने नहीं दिया जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए और इस अव्यवस्था पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने संबंधित विभाग के सीडीपीओ संजीव कुमार से संपर्क साधने का बार-बार प्रयास किया। लेकिन हर बार की तरह अधिकारियों ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों द्वारा फोन न रिसीव किए जाने के कारण इस पूरे मामले पर विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका है। लोगों ने उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर भाजपा नेता राजकुमार राजू ने कहा कि सरकार योजनाएं तो लागू कर देती हैं, लेकिन फील्ड में बैठे कर्मचारियों और स्थानीय नेताओं की आपसी खींचतान का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लापरवाह स्टाफ पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।



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