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पंजाब में 1994 के मध्य तक बहाल हुई शांति:दिलजीत की फिल्म पर बोले पूर्व IAS सिद्धू; कहा-आतंकवाद-हिंसा का कठिन दौर देखा




पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म पर लगातार बयानबाजी चल रही हैं। इस बीच पंजाब सरकार के पूर्व स्पेशल चीफ सेक्रेटरी और रिटायर्ड IAS अधिकारी करण बीर सिंह सिद्धू का बयान सामने आया है। उन्होंने 90 के दशक के पंजाब, खासकर अमृतसर के हालात और उस दौर में हुए बदलावों को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। करण बीर सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्होंने 1992 से 1996 तक अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर (DC) के रूप में कार्य किया। इससे पहले वे 2 वर्षों तक अमृतसर में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (डेवलपमेंट) के पद पर भी तैनात रहे। उन्होंने कहा कि उस समय वर्तमान तरनतारन जिला भी अमृतसर जिले का हिस्सा था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 3 अलग-अलग वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) के साथ काम किया। उनके अनुसार, उस समय पंजाब आतंकवाद और हिंसा के कठिन दौर से गुजर रहा था। 90 के दशक के बाद हालातों में तेजी से सुधार आया करण बीर सिंह सिद्धू ने कहा कि उस दौर में अपहरण, हत्याएं, सामूहिक हत्याकांड, पुलिस मुठभेड़ और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर हमलों जैसी घटनाएं आम हो गई थीं। हालांकि, समय के साथ हालात में तेजी से सुधार आया। उन्होंने बताया कि फरवरी 1992 के विधानसभा चुनावों के बाद पंजाब में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। उनके मुताबिक, वर्ष 1994 के मध्य तक प्रदेश में शांति बहाल हो चुकी थी और लोगों का जीवन फिर से सामान्य पटरी पर लौटने लगा था। दिलजीत दोसांझ की फिल्म से जुड़ा मामला दिलजीत दोसांझ की फिल्म पंजाब के इसी संवेदनशील दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है। ऐसे में उस समय प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के बयान फिल्म की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और घटनाओं को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं।



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