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पंजाब में सब्सिडी वाली खाद इंडस्ट्री को बेचने पर हंगामा:यूरिया संकट पर किसानों का आरोप; कहा-दोषियों पर कार्रवाई न हुई तो करेंगे आंदोलन




पंजाब में यूरिया की कथित कमी को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने पंजाब सरकार के अधीन मार्कफेड और मिल्कफेड के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शनिवार को चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने दावा किया कि किसानों के लिए सब्सिडी पर मिलने वाली यूरिया उन्हें उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जबकि उसका लाभ निजी उद्योगों को पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया, तो भारतीय किसान यूनियन पूरे पंजाब में आंदोलन शुरू करेगी। उनका कहना है कि किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। 266 रुपए की यूरिया नहीं मिल रही: किसान नेता बीकेयू नेताओं ने कहा कि किसानों को 266 रुपए प्रति बैग मिलने वाली सब्सिडी वाली यूरिया समय पर उपलब्ध नहीं हो रही है। उनका आरोप है कि यही यूरिया निजी उद्योगों को 4,000 से 5,000 रुपए प्रति बैग तक बेची जा रही है। उनका कहना है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव नहीं है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी जा चुकी है। प्रेस वार्ता को बीकेयू नेता बलबीर सिंह राजेवाल, मोहाली वेरका के पूर्व अध्यक्ष परविंदर सिंह, मार्कफेड के पूर्व निदेशक सुखविंदर सिंह, गुरविंदर सिंह और परमजीत सिंह बैदवान ने संबोधित किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि कोऑपरेटिव विभाग के कुछ अधिकारी किसानों के हितों की अनदेखी कर निजी उद्योगों को फायदा पहुंचा रहे हैं। मार्कफेड और मिल्कफेड की जांच की मांग किसान नेताओं ने मार्कफेड और मिल्कफेड में कथित अनियमितताओं और मिलीभगत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। नेताओं का दावा है कि निजी उद्योगों को यूरिया की आपूर्ति बढ़ने से उनके उत्पादों की सप्लाई में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, जबकि किसानों के लिए सरकारी वितरण लगातार कम हो रहा है। इससे किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिल पा रही और खेती प्रभावित हो रही है। मिल्कफेड को नुकसान पहुंचाने का आरोप किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि मिल्कफेड को भी लगातार घाटे की ओर धकेला जा रहा है। उनका कहना है कि पहले सामने आए मामलों में भी सरकार ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे सहकारी संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है। बीकेयू नेताओं ने कहा कि प्रदेश में बिजली कटौती और डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती की लागत पहले ही बढ़ चुकी है। ऐसे में यूरिया की कमी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसानों के लिए सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध नहीं है, तो वह निजी उद्योगों तक कैसे पहुंच रही है।



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