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पंजाब में पेड़ कटाई पर हाईकोर्ट सख्त:फरीदकोट की योजना पर सवाल, अधिकारियों से मांगा जवाब; पूछा- क्या दूसरी जमीन की गई थी तलाश?




पंजाब में विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामलों पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि विकास कार्यों के लिए पर्यावरण से समझौता नहीं किया जा सकता और पेड़ काटने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब यह साबित हो जाए कि कोई दूसरा व्यवहारिक विकल्प मौजूद नहीं है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने पेड़ों की कटाई से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए। कोर्ट ने कुछ परियोजनाओं को शर्तों के साथ मंजूरी दी, जबकि बड़े पैमाने पर पेड़ काटने के प्रस्तावों पर अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा। पेड़ कटाई मामले पर कोर्ट की सुनवाई:- 784 पेड़ काटने की मांग पर कोर्ट की नाराजगी फरीदकोट में इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट विकसित करने के लिए 784 पेड़ काटने के प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से ऐसा नहीं लगता कि संबंधित अधिकारियों ने पेड़ों को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास किया हो। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि क्या परियोजना के लिए किसी वैकल्पिक स्थान या दूसरी दिशा में भूमि की तलाश की गई थी। अदालत ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए और फिलहाल मामले पर जवाब तलब कर लिया। जालंधर जिले के कटपालों गांव में गंदे पानी की निकासी और तालाब निर्माण के लिए 33 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत को अनुमति देते हुए शर्त रखी कि प्रत्येक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाए जाएंगे, ताकि पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई की जा सके।



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