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पंजाब में आज से थमेगी सरकारी बसों की रफ्तार:कांट्रेक्ट कर्मी आए संघर्ष की राह पर, 1000 से अधिक रूट प्रभावित होंगे




पंजाब में आज (10 जून को) सरकारी बसों के पहिए रुक जाएंगे। अपनी लंबित मांगों के चलते पनबस के बाद पंजाब रोडवेज के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी दोपहर से चक्का जाम कर देंगे। 23 जिलों के हजारों लोगों को आज आने-जाने में दिक्कत उठानी पड़ेगी। इसके अलावा इंटरस्टेट रूट भी प्रभावित होंगे। मुलाजिमों का कहना है कि बसों के पहिए पूरी तरह से रोक दिए जाएंगे। इस दौरान लोगों को दिक्कत आती है, तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। हालांकि सरकार की तरफ से इस संघर्ष को टालने के प्रयास किए जा रहे हैं। यूनियन की प्रमुख मांगें और विरोध के मुद्दे 1. जेल में बंद कर्मचारियों और नेताओं की रिहाई
आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में जेल भेजे गए यूनियन नेताओं और कर्मचारियों को तुरंत रिहा किया जाए। धारा 307 समेत अन्य मुकदमे वापस लिए जाएं। 2. किलोमीटर स्कीम का विरोध
यूनियन का आरोप है कि सरकार किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को शामिल कर बड़े ट्रांसपोर्टरों को लाभ पहुंचा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यह सरकारी परिवहन व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। 3. कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग
आउटसोर्स, कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित (नोटिफाई) किया जाए। लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को स्थायी रोजगार का लाभ मिले। 4. नई केडर पॉलिसी का विरोध
हाल ही में लागू की गई नई केडर पॉलिसी को वापस लिया जाए। यूनियन का कहना है कि यह नीति कर्मचारियों की पदोन्नति और सेवा हितों के लिए नुकसानदायक है तथा उनके भविष्य को प्रभावित करेगी। 1000 से अधिक रूटों पर चलती हैं बसें पंजाब Roadways और पनबस के बेड़े में कुल मिलाकर तीन हजार से अधिक बसें हैं, जो पंजाब और पड़ोसी राज्यों को जोड़ने वाले 1,000 से अधिक छोटे-बड़े रूटों को सीधे तौर पर जोड़ती हैं। केवल PRTC ही अकेले 577 स्वीकृत रूटों पर बसें चलाता है। इनमें दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जाने वाली पंजाब की बसों पर असर पड़ेगा। जहां तक मुलाजिमों की बात है तो इनकी संख्या 8500 के करीब है। इसमें 5500 के करीब कॉन्ट्रैक्ट कर्मी हैं। ऐसे में बसों से लेकर डिपो तक असर पड़ेगा। बसों का बड़ा असर कहां वैसे तो इस हड़ताल का असर पूरे राज्य में पड़ेगा। क्योंकि इस समय पंजाब में गर्मी का सीजन पीक पर है। स्कूलों में छुट्टियां हैं। ऐसे में अधिकतर परिवार घूमने के लिए निकल रहे हैं। ऐसे में उन्हें प्राइवेट बसों पर निर्भर रहना होगा। दूसरी तरफ कुछ जगह कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट्स को भी मुश्किल उठानी पड़ सकती है। इस समय एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल जाने वाले मरीज भी प्रभावित होंगे। सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर पड़ेगा। क्योंकि वहां बसों के रूट सीमित हैं। साथ ही ये बसें वहां लाइफलाइन का काम करती हैं। इसके अलावा महिला वर्ग, जिन्हें फ्री में सफर की सुविधा है, उन्हें भी परेशानी उठानी पड़ेगी। हड़ताल से 15 करोड़ तक का नुकसान संभव पंजाब रोडवेज और पनबस की प्रतिदिन की सरकारी कमाई लगभग 2 से 3 करोड़ रुपए के बीच है। वहीं पीआरटीसी (PRTC) की दैनिक आय भी करीब 2.5 से 3 करोड़ रुपये रहती है। ऐसे में यदि तीन दिन का पूर्ण चक्का जाम होता है, तो तीनों उपक्रमों को मिलाकर सरकार को 12 से 15 करोड़ रुपये तक का सीधा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है। पहले हुए आंदोलनों के कारण भी परिवहन निगमों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। क्या कहते हैं मुलाजिम पीआरटीसी व पनबस कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी यूनियन के महासचिव शमशेर सिंह ने बताया कि पिछले महीने से अब तक सरकार की तरफ से तीन बैठकें हो चुकी हैं। इनमें 8 मई, 2 जून और 4 जून शामिल हैं। लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है। ऐसे में हमें यह फैसला लेना पड़ा है। हड़ताल में लोगों के पास क्या विकल्प हड़ताल के दौरान पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को दिक्कत उठानी पड़ेगी। बाकी सभी जगहों पर अन्य राज्यों और प्राइवेट बसों की सेवा उपलब्ध है, जो कुछ अंतराल के बाद चलती रहती हैं। लेकिन उनमें भीड़ ज्यादा रहने का अनुमान है। ऐसे में लोगों को जल्दी घर से निकलना होगा। इसके अलावा सरकार भी इस हड़ताल को टालने की कोशिश करेगी। क्योंकि आने वाले समय में चुनाव हैं। इसके अलावा सरकार ने आज कैबिनेट मीटिंग भी रखी हुई है।



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