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पंजाब में आज (30 अप्रैल) से स्व-गणना शुरू हो रही है, जो 14 मई तक चलेगी। CM भगवंत मान संगरूर से इस मुहिम का आगाज करेंगे। इस काम के लिए 67 हजार मुलाजिम तैनात किए गए हैं। स्वगणना की ऑनलाइन सुविधा भी पहली बार दी गई है। सेल्फ-एन्युमरेशन एक वेब पोर्टल के जरिए होगा, जिसमें लोग घर-घर सर्वे से 15 दिन पहले अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन भर सकेंगे। पोर्टल पर फॉर्म भरने के लिए 16 भाषाएं दी गई हैं। यह बिल्कुल ऑप्शनल है। जो लोग स्व-गणना नहीं करेंगे, वे पारंपरिक तरीके से सरकारी कर्मचारी के घर आने पर डेटा दे सकते हैं। जिन्होंने ऑनलाइन फॉर्म भरा है, उनका डेटा वेरिफाई करने के लिए भी सरकारी कर्मचारी उनके घर जाएंगे। लोगों को खुद ही अपने मोबाइल या लैपटॉप में जाकर जानकारी भरनी होगी। इसके बाद पहला चरण यानी मकान की सूची और आवास गणना 15 मई 2026 से शुरू होकर 13 जून 2026 तक चलेगी। कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से 33 सवाल पूछेंगे, जिनमें मकान और सुविधाओं से जुड़े सवाल होंगे। सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक भर सकेंगे स्व-गणना के लिए किसी ऐसे मोबाइल नंबर का इस्तेमाल न करें, जो पहले से किसी अन्य परिवार द्वारा इस्तेमाल किया गया हो। परिवार के मुखिया के लिए नकली या अस्थायी नाम न डालें, क्योंकि बाद में इसे बदला नहीं जा सकता। अपना लॉगिन OTP किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें, चाहे वह खुद को सेंसस अफसर ही क्यों न बताए। आधार, पैन या बैंक डिटेल जैसे संवेदनशील दस्तावेज अपलोड या साझा न करें, क्योंकि इनकी आवश्यकता नहीं है। उन परिवार के सदस्यों को शामिल न करें, जो स्थायी रूप से कहीं और जा चुके हैं या काम/पढ़ाई के लिए बाहर रह रहे हैं। मैप पर अपनी लोकेशन गलत तरीके से न चुनें। यह आपकी असली रहने की जगह होनी चाहिए। कोई भी सवाल खाली न छोड़ें। सिस्टम आमतौर पर आगे बढ़ने नहीं देता। यह न मानें कि प्रक्रिया पूरी हो गई है, जब तक आपको SE ID के साथ सफलता स्क्रीन न दिख जाए। रात 12 बजे के बाद पोर्टल का उपयोग न करें, क्योंकि यह केवल सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक ही सक्रिय रहता है। कर्मचारी अगर ये 3 सवाल पूछें तो जवाब न दें आमदनी: महीने की कमाई या बैंक बैलेंस से जुड़ा कोई भी सवाल। दस्तावेज: आधार, पैन या कोई भी अन्य पहचान पत्र दिखाने का दबाव। बैंक डिटेल: बैंक खाता नंबर या OTP जैसे निजी विवरण। मोबाइल में FM तो रेडियो, लिव-इन में हैं तो शादीशुदा लिव-इन: काफी समय से साथ रह रहे जोड़े को जनगणना में ‘विवाहित युगल’ माना जाएगा। रेडियो-टीवी: मोबाइल में FM है तो ‘रेडियो’ गिना जाएगा। मोबाइल पर यूट्यूब देखना ‘टीवी’ नहीं माना जाएगा, इसके लिए टीवी होना जरूरी है। वाहन: कार/जीप की श्रेणी में ट्रैक्टर दर्ज नहीं होगा। ई-रिक्शा/ऑटो को कार या बाइक नहीं मानेंगे। पानी: घर में नल हो, फिर भी बोतल या कैन का पानी मंगाते हैं, तो ‘बॉटल्ड वाटर’ लिखें। किचन: घर के एक हिस्से में खाना बनाते और सोते हैं, तो उसे ‘रसोई’ नहीं मानेंगे। रसोई तभी दर्ज होगी, जब घर में अलग से हो। 67 हजार एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर नियुक्त राज्य में जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत लगभग 51,561 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) बनाए जा चुके हैं। इस कार्य के लिए करीब 67,000 एन्यूमरेटर (गणनाकार) और सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें लगभग 56,544 एन्यूमरेटर और 10,368 सुपरवाइजर शामिल हैं। इन नियुक्तियों में स्कूल शिक्षक, क्लर्क तथा राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के अधिकारी भी शामिल हैं। प्रत्येक एन्यूमरेटर को लगभग 700 से 800 लोगों का डेटा एकत्र करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं, एक सुपरवाइजर के अधीन करीब 6 एन्यूमरेटर काम करेंगे और उनकी निगरानी करेंगे। स्वगणना के लिए केंद्र सरकार के पोर्टल पर जाना है, जिसमें लॉगिन कर 16 भाषाओं में जवाब दे पाएंगे। हेल्पलाइन पर हर मुश्किल का हल होगा जनगणना को लेकर कोई दिक्कत है तो अधिकारी को शिकायत कर सकते हैं या अधिकारी से बात भी कर सकते हैं। इसके लिए 1855 नंबर पर कॉल करनी होगी। यह सेवा 24 घंटे चालू रहेगी और 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी। जरूरत पड़ने पर आपकी कॉल सीधे जनगणना विभाग के अधिकारी तक पहुंचाई जा सकती है। यह सुविधा सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक सोमवार से शनिवार उपलब्ध रहेगी। एन्यूमरेटर और लोगों की यह जिम्मेदारी तय एन्यूमरेटर वह व्यक्ति होता है, जो घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करता है। वह लोगों से आराम से और साफ तरीके से सवाल पूछेगा। फॉर्म जमा करने से पहले सब कुछ चेक करेगा कि सही है या नहीं। आपकी दी गई जानकारी को गोपनीय रखेगा। वहीं, जिसके घर जनगणना वाले आएंगे, उसकी जिम्मेदारी है कि वह सही और पूरी जानकारी दे। अगर कोई बात समझ न आए तो पूछ लेना चाहिए। पंजाब में पहली ड्रग जनगणना भी पंजाब सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से भारत की पहली व्यापक ‘ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना’ शुरू की है, जिसका उद्देश्य 65 लाख परिवारों का सर्वेक्षण कर नशे के खिलाफ ‘डेटा-आधारित’ पुनर्वास नीतियां बनाना है। लगभग 28,000 सरकारी कर्मचारियों द्वारा तीन महीने में पूरी की जाने वाली इस 150 करोड़ रुपए की पहल का लक्ष्य नशा मुक्ति के लिए व्यापक डेटा तैयार करना है।
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पंजाब में आज से घर बैठे कर पाएंगे स्व-गणना:CM भगवंत मान संगरूर से करेंगे शुरूआत, 33 सवालों के जवाब देने होंगे







