पंजाब में जमीन अधिग्रहण में देरी और राज्य सरकार से जमीन नहीं मिलने के कारण राज्य के 3 बड़े रेल प्रोजेक्ट कई सालों से अटके हुए थे। अब केंद्र सरकार ने इन्हें अपने हाथ में ले लिया है। केंद्रीय रेल मंत्री ने एक सवाल के जवाब में यह खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं की जमीन खरीदने और निर्माण का पूरा खर्च केंद्र सरकार ही उठाएगी। इन प्रोजेक्ट्स को रणनीतिक, सामाजिक और धार्मिक महत्व का मानते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा बठिंडा-राजपुरा रूट पर ट्रेनों की स्पीड सीमा बढ़कर 110 किमी/घंटा कर दी गई है। अब तीनों प्रोजेक्टों को तीन प्वाइंटों में जानिए
फिरोजपुर – पट्टी नई रेल लाइन (26 किमी) लागत: ₹764 करोड़ इलाका: फिरोजपुर और तरनतारन क्यों अटकी? 2017-18 में मंजूरी मिली थी। पंजाब सरकार को 166 हेक्टेयर जमीन लेकर रेलवे को देनी थी, लेकिन जमीन नहीं मिल सकी। अब क्या होगा? अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास होने की वजह से केंद्र सरकार जमीन खरीदने और प्रोजेक्ट का पूरा खर्च खुद उठाएगी। मौजूदा स्थिति: जमीन अधिग्रहण अंतिम चरण में है और मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। फायदा: फिरोजपुर और अमृतसर क्षेत्र के बीच दूरी कम होगी और सेना की आवाजाही आसान होगी। 2. रामा मंडी – तलवंडी साबो नई रेल लाइन (29 किमी) लागत: ₹154 करोड़ इलाका: बठिंडा क्यों अटकी? तख्त श्री दमदमा साहिब तक रेल सुविधा देने के लिए यह लाइन बननी थी। इसके लिए 192 हेक्टेयर जमीन चाहिए थी, लेकिन राज्य सरकार जमीन नहीं दे सकी। अब क्या होगा? श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट बनाकर जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। मौजूदा स्थिति: जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से शुरू हो गया है। 3. कादियां – ब्यास नई रेल लाइन (40 किमी) लागत: ₹842 करोड़ इलाका: गुरदासपुर और ब्यास (अमृतसर) क्यों अटकी? 2011-12 में मंजूरी मिलने के बाद स्थानीय विवाद और कानून-व्यवस्था के कारण काम रोक दिया गया था। अब क्या होगा? केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने का फैसला लिया है और इसे स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट का दर्जा दिया है। मौजूदा स्थिति: निर्माण और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई है। फायदा: लोगों की यात्रा आसान होगी और व्यापार व कनेक्टिविटी बेहतर होगी। राजपुरा-मोहाली रेल लाइन को मंजूरी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ₹443 करोड़ की लागत से 18 किलोमीटर लंबी राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन को मंजूरी मिल गई है। इसके बनने से बठिंडा, धूरी, सरहिंद और राजपुरा से चंडीगढ़ व मोहाली का सीधा रेल संपर्क होगा। अभी मालवा क्षेत्र की ट्रेनों को अंबाला होकर जाना पड़ता है और राजपुरा में इंजन की दिशा भी बदलनी पड़ती है, जिससे समय ज्यादा लगता है। नई रेल लाइन और ₹412 करोड़ की राजपुरा बाईपास लाइन बनने के बाद ट्रेनें बिना रुके सीधे मोहाली जा सकेंगी। इसके लिए 73 हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस लाइन के लिए 2026-27 के बजट में ₹100 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
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