हरियाणा की आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। प्रदेशभर से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित धरना स्थल पर पहुंची हैं। प्रदर्शन को लीड करने वाली महासचिव उर्मिला रावत ने बताया कि सरकार उनसे सरकारी योजनाओं का पूरा काम तो ले रही है, लेकिन उन्हें न तो सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जा रहा है और न ही सम्मानजनक वेतन। प्रदर्शन की सूचना पर महिला एवं बाल विकास विभाग के ACS ने वार्ता के लिए बुलाया है। जिनसे वार्ता के लिए आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स महासचिव उर्मिला रावत, ऊषा रानी राष्ट्रीय महासचिव, सीटू महासचिव कामरेड जयभगवान गए हैं। सरकारी कर्मचारी का दर्जा सबसे बड़ी मांग आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स की सबसे प्रमुख मांग उन्हें स्थायी सरकारी कर्मचारी घोषित करने की है। उनका कहना है कि वर्षों से वे महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कर रही हैं, लेकिन आज भी उन्हें मानदेय आधारित कर्मचारी मानकर सीमित सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा कार्यकर्ताओं ने वर्तमान मानदेय को बढ़ाकर न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में मौजूदा भुगतान से परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिक का दर्जा देने की मांग प्रदर्शनकारी वर्कर्स का कहना है कि उन्हें कुशल (स्किल्ड) श्रमिक तथा हेल्पर्स को अर्ध-कुशल (सेमी-स्किल्ड) श्रमिक की श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभ उन्हें भी मिल सकें। उनका यह भी आरोप है कि वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में जिन मांगों और समझौतों पर सहमति बनी थी, उन्हें अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया। इसी कारण बार-बार आंदोलन की नौबत आ रही है।
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