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टॉर्च की रोशनी में प्रसव मामले पर आयोग सख्त हुआ:मानवाधिकार आयोग ने फरीदाबाद सीएमओ से मांगी रिपोर्ट, अगस्त में होगी मामले की सुनवाई




फरीदाबाद के सेक्टर-3 स्थित प्रजनन एवं स्वास्थ्य शिशु केंद्र (एफआरयू-2) के बाहर टॉर्च की रोशनी में महिला के प्रसव होने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग से जवाब-तलब किया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. जयंत आहूजा से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव के लिए पहुंची महिला को समय पर चिकित्सा सहायता न मिलना बेहद चिंताजनक है। यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मरीजों के मूल अधिकारों से भी जुड़ा विषय है।
पार्किंग परिसर दिया था बच्चे को जन्म जानकारी के अनुसार, 15 और 16 मई की दरम्यानी रात एक गर्भवती महिला बलेश को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिजन सेक्टर-3 स्थित स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का मुख्य द्वार बंद था और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी कोई कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं था। इसी दौरान अस्पताल परिसर के बाहर ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसव के दौरान महिला की सास ने टॉर्च की रोशनी में जच्चा-बच्चा की देखभाल की। 20 मिनट बाद अस्पताल का स्टाफ मौके पर पहुंचा बताया गया है कि बच्चे के जन्म के करीब 20 मिनट बाद अस्पताल का स्टाफ मौके पर पहुंचा और मां व नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच शुरू की थी। मानवाधिकार आयोग ने सीएमओ डॉ जयंच आहूजा से घटना के समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का रोस्टर, उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड, उपचार में हुई देरी के कारण तथा संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा है। 9 अगस्त को होगी सुनवाई यह भी पूछा है कि अस्पताल के बाहर प्रसव होने की नौबत क्यों आई, आपातकालीन प्रवेश द्वार बंद क्यों था और उस समय लेबर रूम तथा इमरजेंसी सेवाओं की क्या स्थिति थी। साथ ही महिला और नवजात शिशु की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है। आयोग ने सुनवाई से एक सप्ताह पहले पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।



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