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झज्जर में किन्नर के साथ दरिंदगी की हदें पार:पहले सात-आठ लोगों ने मिलकर किया हमला, बाद अमानवीय कृत्य




झज्जर जिले में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। छुछकवास इलाके से जुड़े खेतावास गांव के पास एक किन्नर के साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गईं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है। सात-आठ लोगों ने मिलकर किया हमला पीड़ित किन्नर ने अपनी शिकायत में बताया कि घटना के दौरान करीब सात से आठ लोग, जो महिलाओं के कपड़े पहने हुए थे, उसे जबरन अपने कब्जे में लेकर गए। आरोप है कि आरोपियों ने पहले उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। नंगा कर खेत से उठाई गेहूं की फांस, किया अमानवीय कृत्य शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने मारपीट के बाद किन्नर को नंगा कर दिया और पास के खेत से गेहूं की फांस उठाकर उसके गुप्तांग में डाल दी। इस हैवानियत भरे कृत्य से पीड़ित को गंभीर शारीरिक और मानसिक चोट पहुंची। हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती घटना के बाद किन्नर की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तुरंत झज्जर के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है और वह अभी भी सदमे में बताया जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन जानकारी देने से बच रही सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़ित के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में है। जांच अधिकारी (आईओ) और चौकी इंचार्ज सतबीर के बीच जानकारी को लेकर स्पष्टता नहीं है—दोनों एक-दूसरे पर बयान देने की जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस इस संवेदनशील मामले में खुलकर जानकारी क्यों नहीं दे रही। आरोपी कौन? पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल अब तक आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। क्षेत्र में चर्चा है कि आखिर वे लोग कौन थे, जिन्होंने इतनी भयावह घटना को अंजाम दिया। साथ ही, यह भी सवाल उठ रहा है कि पुलिस पूरे मामले की जानकारी साझा करने से पीछे क्यों हट रही है। चारों ओर निंदा, सख्त कार्रवाई की मांग इस घटना की चारों तरफ कड़ी निंदा की जा रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष है। सभी की नजर अब पुलिस कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि ऐसे अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए, ताकि समाज में कानून का डर बना रहे और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बड़ा सवाल: क्या सुरक्षित हैं किन्नर समुदाय के लोग? यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज के हाशिए पर रहने वाले किन्नर समुदाय की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीरता से काम किया जा रहा है। जब इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं और पुलिस भी स्पष्ट जानकारी देने से बचती नजर आती है, तो यह व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।



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