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झज्जर ब्लड बैंक में गबन का आरोपी लेखाकार बर्खास्त:दान किए गए खून की राशि 19.14 लाख का किया था गबन,3 साल तक खाते में जमा नहीं कराई रकम




झज्जर के सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में 19 लाख 14 हजार 800 रुपए के गबन के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी लेखाकार अखिल को बर्खास्त कर दिया है। आरोप है कि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए ब्लड बैंक से उपलब्ध कराए गए रक्त की एवज में मिलने वाली निर्धारित सरकारी राशि को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय हड़प लिया गया। शुरुआती जांच में करीब तीन साल के दौरान गबन की गई राशि 19.14 लाख रुपए सामने आई है।
नियम के अनुसार सरकारी ब्लड बैंक से निजी अस्पतालों को रक्त उपलब्ध कराने के बदले निर्धारित सरकारी राशि ली जाती है। यह राशि सरकारी बैंक खाते में जमा कराना अनिवार्य होता है। स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम के तहत तैनात लेखाकार अखिल को ब्लड बैंक से संबंधित राशि के कलेक्शन और उसे खाते में जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर उसने राशि में गड़बड़ी की।
चार्ज छोड़ने के आदेश के बाद भी कलेक्शन करता रहा
जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत उप सिविल सर्जन (एड्स) की ओर से 6 मई 2025 को ब्लड बैंक से राशि कलेक्शन का चार्ज अखिल से लेकर डाटा मैनेजर कम अकाउंटेंट राजीव को सौंपने के आदेश जारी किए गए थे। आरोप है कि अखिल ने नए नियुक्त लेखाकार को चार्ज देने से इनकार कर दिया और लगातार आनाकानी करता रहा।
राजीव ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को मौखिक शिकायत भी की थी। इसके बावजूद आरोप है कि अखिल 6 मई 2025 से मार्च 2026 तक ब्लड बैंक से संबंधित राशि का कलेक्शन करता रहा। इसके बाद अप्रैल 2026 में राजीव ने ब्लड बैंक का चार्ज संभाला।
खाता खाली हुआ तो अधिकारियों को हुआ शक
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब ब्लड बैंक के सरकारी खाते में जमा राशि लगातार कम होती गई और खाता लगभग खाली हो गया। जांच में सामने आया कि निजी अस्पतालों से रक्त की आपूर्ति के बदले आने वाली राशि नियमित रूप से सरकारी खाते में जमा नहीं कराई जा रही थी।
अधिकारियों को गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। शुरुआती जांच में करीब तीन साल के दौरान 19 लाख 14 हजार 800 रुपए के गबन का पता चला। इसके बाद विभाग की ओर से आरोपी लेखाकार के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई और बर्खास्तगी की सिफारिश की गई।
भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. मंजू कादियान ने कहा कि मामले की जांच के बाद रिपोर्ट मुख्यालय को भेजकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। विभाग ने अखिल को बर्खास्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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