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जालंधर का अर्जुन-गली से टीम इंडिया तक की कहानी:मां खाना न खाने से थी परेशान, डाइट के लिए क्रिकेट एकेडमी भेजा; अब खेलेगा पहला इंटरनेशनल




जालंधर का अर्जुन 4 जुलाई को अपना पहला इंटरनेशनल श्रीलंका के खिलाफ खेलेगा। 3 वन डे और टेस्ट मैच में आलराउंडर की भूमिका में अर्जुन की सिलेक्शन इंडिया की अंडर 19 टीम में हुई है। गली में भाई करण का अपने कद से लंबा बैट पकड़कर 7 साल की उम्र में अर्जुन ने पहला शॉट लगाया। उत्तर प्रदेश के आगरा से आकर जालंधर में पिता होती राम ने भटूरे बनाने का काम शुरू किया। 5 भाई बहनों में अर्जुन सबसे छोटा है। 1997 में जन्में अर्जुन ने सबकी तरह गली में खेलना शुरू किया। बड़ा भाई करण भी क्रिकेट खेलता थआ कि किसी कारणवश खेल को आगे नहीं बढ़ा पाया। मां ने बताया कि जब अर्जुन ठीक से बोलना भी नहीं सीखा था तो उससे पूछा जाता था कि बड़े होकर क्या करोगे, इस पर उसका एक ही इशारा होता था कि बड़े भाई की तरह खेलूंगा। मां ने बताया 7 साल की उम्र में अर्जुन बेट पकड़ सुबह से शाम तक गली में खेलता रहता। सौ बार बुलाने पर भी खाना खाने नहीं आता। इससे दुखी होकर सोचा कि इसे क्रिकेट एकेडमी में डाल दूंगी, कम से कम वहां खाना तो खाएगा। तब नहीं सोचा था कि अर्जुन कभी टीम इंडिया का हिस्सा बनेगा। मां ने बताया कि जैसे ही उसे पता चला कि अर्जुन की सिलेक्शन हो गई है तो सबसे पहले वह मंदिर गई। भगवान का शुक्रिया किया इसके बाद अर्जुन से बात की। अर्जुन सहित पूरे परिवार ने दैनिक भास्कर के साथ उसके बचपन और गली क्रिकेट से लेकर टीम इंडिया तक पहुंचने की कहानी शेयर की। 5 पाइंट में जानिए अर्जुन का कहानी… भाई करण बोला-ये खुद को आउट नहीं मानता था
अर्जुन के बचपन के खेल को याद करते हुए बड़े भाई करण ने बताया कि मैं खेलता था तो अर्जुन मेरे पुराने बैट लेकर खेलने आ जाता था। बैट उसके कद से भी लंबे होते थे लेकिन शॉर्ट मार लेता था। एक बार वो बैट पकड़ लेता था तो फिर हटता नहीं था। वो खुद को कभी दूसरी भूमिका में मानता ही नहीं था। न बाउलिंग , न फील्डिंग केवल बैटिंग। उसने कभी खुद को आउट नहीं माना। आउट होती भी तब भी कहता मैं तो बैटिंग ही करूंगा। मेरा भी सपना था कि अर्जुन इंटरनेशनल खेले और आज उसने मेरा सपना पूरा कर दिया है। बहनें बोलीं-हमारा लड्डू क्रिकेटर बन गया
अर्जुन की बहन किरन राजपूत ने बताया कि उसने एमए इक्नॉमिक्स किया है। मेरी बाउंडिंग अर्जुन के साथ सबसे प्यारी है। मैंने उसके लिए बहुत फीलडिंग की है। वो बैट नहीं छोड़ता था और मुझसे फील्डिंग करवाता रहता था। बहन ने बताया कि मैं तो उसे लड्डू कहकर बुलाती हूं। बचपन में जब वो खाना खाने नहीं आता था तो उसे अवाजें लगाती रहती थी कि लड्डू आ जा, खाना खाने के बाद खेल लेना लेकिन क्रिकेट के लिए उसका इतना जुनून था कि भूखे-प्यार खेलने में लगा रहता था। दूसरी बहन लक्ष्मी राजपूत ने बताया कि उसका काम तो स्टडी डिपार्टमेंट का रहा है और मैंने उसे पढ़ाया है, मुझे इसकी बहुत खुशी है।



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