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पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी सियासत में एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ सामने आया है। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अचानक पार्टी के वरिष्ठ व बेबाक नेता और पूर्व सांसद शमशेर सिंह दूलो से उनके निवास स्थान पर मुलाकात की है। हालांकि, ऊपरी तौर पर इस बैठक को एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और टाइमिंग को देखते हुए इसके गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह मुलाकात इसलिए भी सबसे ज्यादा अहम मानी जा रही है क्योंकि शमशेर सिंह दूलो लंबे समय से पार्टी के भीतर अपनी बेबाक और बागी राय रखने वाले सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं। उनके राजनीतिक विरोध का इतिहास काफी लंबा रहा है। इस 45 मिनट की बैठक के क्या मायने ऐसे में चन्नी के साथ सीधे तौर पर मतभेद रखने वाले वरिष्ठ नेता शमशेर सिंह दूलो के घर जाकर राजा वड़िंग का बैठना, पंजाब की सियासत में कई बड़े राजनीतिक संदेश दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस के भीतर इस समय वर्चस्व की एक परोक्ष (अप्रत्यक्ष) जंग चल रही है। एक तरफ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनका खेमा लगातार अपने समर्थकों के जरिए सूबे की सियासत में खुलकर अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहा है। दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग बिना किसी शोर-शराबे और हंगमे के पार्टी के पुराने और नाराज चल रहे वरिष्ठ नेताओं से वन-टू-वन संवाद बढ़ा रहे हैं। माना जा रहा है कि वे संगठन के भीतर चन्नी विरोधी और न्यूट्रल नेताओं को साधकर अपना समर्थन मजबूत करने की अंदरूनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। चन्नी से मतभेद रखने वाले दूलो का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ कब कब खोला मोर्चा कैप्टन के खिलाफ खोला था मोर्चा: दूलो ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला था। चन्नी के सीएम बनने पर उठाए थे सवाल: कैप्टन के बाद जब पार्टी ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया तो दूलो ने इस फैसले पर भी तीखे सवाल खड़े किए थे। उनका तर्क था कि चन्नी दूसरे दल से कांग्रेस में आए थे और पार्टी ने उन्हें उम्मीद और वरिष्ठता से कहीं अधिक सम्मान और बड़ा पद दे दिया। कार्यशैली पर उठाए सवाल: दूलो ने न सिर्फ चन्नी की ताजपोशी का विरोध किया, बल्कि मुख्यमंत्री के तौर पर चन्नी के छोटे से कार्यकाल और उनकी कार्यशैली पर भी समय-समय पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए थे। शिष्टाचार भेंट या बड़ी गुटबंदी की शुरुआत? हालांकि, इस बंद कमरे की बैठक के एजेंडे को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी दोनों नेताओं की तरफ से साझा नहीं की गई है। मुलाकात के बाद राजा वड़िंग ने इसे पार्टी के एक अत्यंत वरिष्ठ नेता से महज एक शिष्टाचार भेंट और भविष्य के लिए मार्गदर्शन लेने की मुलाकात बताया है। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस बैठक का सीधा उद्देश्य चन्नी के खिलाफ किसी विशेष गुटबंदी को मजबूत करना था या नहीं, लेकिन मौजूदा नाजुक राजनीतिक परिस्थितियों में इस मुलाकात ने पंजाब कांग्रेस के भीतर शांत दिख रही हलचल को एक बार फिर से हवा दे दी है। अब देखना यह होगा कि वड़िंग की इस ‘साइलेंट डिप्लोमेसी’ का चन्नी खेमा क्या जवाब देता है।
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चन्नी के 'शक्ति प्रदर्शन' के बीच वड़िंग का ‘साइलेंट गेम’:पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी जंग: पूर्व सीएम के धुर विरोधी दूलो से मिले प्रदेश अध्यक्ष, बंद कमरे में बैठक







