चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को अब वाई-फाई की समस्या से राहत मिलने जा रही है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस में वाई-फाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नई ऑप्टिकल फाइबर अंडरग्राउंड बिछाने की योजना शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, पीयू के कंप्यूटर सेंटर की ओर से 97 कोर की नई ऑप्टिकल फाइबर कैंपस में अंडरग्राउंड डाली जाएगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और करीब 15 कंपनियों ने आवेदन किया है। बेहतर बिड फाइनल होने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। 3-4 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
प्रशासन के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा और इसके बाद इस पूरे प्रोजेक्ट को करीब 3 से 4 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसमें पहले कैंपस के मुख्य हिस्सों में खुदाई कर ऑप्टिकल फाइबर के लिए अंडरग्राउंड लाइन डाली जाएगी, उसके बाद उसे अलग-अलग विभागों, हॉस्टलों और लाइब्रेरी से जोड़ा जाएगा। इस योजना पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बजट में नई 97 कोर ऑप्टिकल फाइबर केबल खरीदना, उसे जमीन के अंदर सुरक्षित तरीके से बिछाना, इंस्टॉलेशन, कनेक्टिविटी सिस्टम को अपग्रेड करना और टेस्टिंग जैसे सभी काम शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह एक लंबी अवधि का समाधान होगा, जिससे बार-बार नेटवर्क खराब होने की समस्या खत्म होगी और छात्रों को तेज वाई-फाई सुविधा लगातार मिल सकेगी। वाई-फाई की समस्या के लिए दो कर्मचारी तैनात
वाई-फाई नेटवर्क में आने वाली समस्याओं को तुरंत ठीक करने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दो कर्मचारियों की विशेष रूप से तैनाती की है। ये कर्मचारी कंप्यूटर सेंटर के अधीन काम करेंगे और कैंपस में नेटवर्क से जुड़ी किसी भी तकनीकी दिक्कत पर नजर रखेंगे। इनकी ड्यूटी खासतौर पर शाम के समय शिफ्ट में लगाई गई है, क्योंकि इसी दौरान हॉस्टलों और लाइब्रेरी में छात्रों द्वारा इंटरनेट का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। अगर किसी हॉस्टल, विभाग या लाइब्रेरी में वाई-फाई धीमा चलता है या बंद हो जाता है, तो ये कर्मचारी मौके पर जाकर तुरंत समस्या को ठीक करेंगे। इसके अलावा ये टीम नियमित रूप से नेटवर्क की मॉनिटरिंग भी करेगी, ताकि पहले से ही तकनीकी खामियों का पता लगाकर उन्हें दूर किया जा सके। इससे छात्रों को लगातार और बिना रुकावट के बेहतर इंटरनेट सुविधा मिल सकेगी। छात्रों की शिकायतों के बाद लिया फैसला
काफी समय से छात्र लगातार यह शिकायत कर रहे थे कि हॉस्टलों और लाइब्रेरी में वाई-फाई नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर रहा है। कई जगहों पर इंटरनेट की स्पीड बहुत धीमी रहती थी, जबकि कई बार कनेक्शन बार-बार कट जाता था। खासतौर पर परीक्षा के समय और असाइनमेंट जमा करने के दौरान छात्रों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता था। लाइब्रेरी में पढ़ाई करने वाले छात्रों ने भी कई बार बताया कि ऑनलाइन स्टडी मटेरियल खोलने, रिसर्च करने और नोट्स डाउनलोड करने में दिक्कत आती है। वहीं हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को ऑनलाइन क्लास, प्रोजेक्ट वर्क और पढ़ाई से जुड़े काम करने में बाधा आ रही थी। इन लगातार शिकायतों और समस्याओं को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वाई-फाई नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है, ताकि छात्रों को बिना रुकावट तेज इंटरनेट सुविधा मिल सके और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। जमीन के नीचे बिछेगी फाइबर, नहीं टूटेंगी तारें
कंप्यूटर सेंटर की अधिकारी सोनल चावला के अनुसार, मौजूदा समय में कई जगहों पर ऑप्टिकल फाइबर केबल जमीन के ऊपर या कम गहराई में बिछी हुई हैं। ऐसे में कैंपस के अंदर भारी वाहनों के गुजरने, सड़क मरम्मत या किसी तरह की खुदाई के दौरान ये केबल बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे वाई-फाई नेटवर्क प्रभावित होता है और कनेक्शन बार-बार बंद हो जाता है। इसी समस्या को खत्म करने के लिए अब नई ऑप्टिकल फाइबर को जमीन के अंदर अधिक गहराई में और सुरक्षित तरीके से बिछाया जाएगा। इसके लिए पहले गहरे गड्ढे खोदे जाएंगे और फिर केबल को प्रोटेक्टिव पाइप के अंदर डालकर इंस्टॉल किया जाएगा, ताकि उस पर बाहरी दबाव या नुकसान का असर न पड़े। इस व्यवस्था से न केवल केबल सुरक्षित रहेंगी, बल्कि नेटवर्क की स्थिरता भी बढ़ेगी। बार-बार केबल टूटने की समस्या खत्म होने से इंटरनेट स्पीड बेहतर होगी और छात्रों को बिना रुकावट लगातार वाई-फाई सुविधा मिल सकेगी।
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