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चंडीगढ़ सांसद बोले- सिर झुकाता तो बड़ा पद मिलता:हबीब जालिब की शायरी ट्वीट की; पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ने की अटकलें




चंडीगढ़ से कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी का पार्टी में अनदेखी को लेकर फिर दर्द छलका है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर हबीब जालिब की शायरी ट्वीट की है। जिसमें तिवारी ने लिखा- झुका के सर को हो जाता जो ‘सर’ मैं, तो लीडर भी अज़ीमुश्शान होता… इसमें कवि कहता है कि अगर मैं भी सिर झुका देता, समझौता कर लेता या सत्ता के आगे नतमस्तक हो जाता, तो मैं भी बड़ा नेता, बड़ा पद या सम्मान पा सकता था। लेकिन मैंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया, इसलिए शायद मुझे वह पद या प्रतिष्ठा नहीं मिली। हबीब जालिब की इस शायरी का मूल संदेश सत्ता के सामने झुकने के बजाय स्वाभिमान और सिद्धांतों पर अडिग रहने का रहा है। ऐसे में कयास लगाने जा रहे हैं कि पंजाब चुनाव से पहले ही वह कांग्रेस से काफी नाराज हैं। चुनाव से पहले ही वह कांग्रेस छोड़ सकते हैं। हालांकि तिवारी की तरफ से इसको लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि इस बारे में कांग्रेस प्रवक्ता जसकरण सिंह काहलों ने कहा- मैंने पोस्ट पढ़ी। शेरो-शायरी की मैं ज्यादा समझ नहीं रखता, लेकिन ये जानता हूं कि मनीष तिवारी को बस ये अच्छा लगा होगा, तो शेयर किया। तिवारी जी बहुत सीनियर लीडर हैं। बहुत बड़ा तुजुर्बा है, वो हमारे एसेट हैं। उनके पोस्ट को गलत नहीं समझना चाहिए। पहले कहा था- मेरी योग्यता असुरक्षा बनी
इससे पहले कांग्रेस हाईकमान के पंजाब चुनाव 2027 को लेकर कमेटियों का ऐलान किया गया तो मनीष तिवारी को कोई पद नहीं दिया गया। इसके बाद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए लिखा था- “जब आपकी योग्यता दूसरों की असुरक्षा बन जाती है, तो फैसले सांगठनिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से प्रेरित होते हैं।” तिवारी ने आगे लिखा कि उन्होंने 1981 में NSUI के एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। छात्र राजनीति से लेकर युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सांसद बनने तक, उन्होंने साढ़े 4 दशकों तक पूरी निष्ठा के साथ सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस पार्टी की सेवा की है। ऐसे में आज उन्हें दरकिनार किए जाने का फैसला पूरी तरह से चौंकाने वाला है। पोस्ट के अंत में उन्होंने मशहूर अंग्रेजी गीत की पंक्ति लिखी, ‘Que sera, sera, Whatever will be, will be…’, जिसका अर्थ है- “जो होगा, सो होगा।” “भविष्य में जो होना है, वही होगा। बता दें कि इस पंक्ति को 1956 में Doris Day ने अपने प्रसिद्ध गीत “Que Sera, Sera (Whatever Will Be, Will Be)” से लोकप्रिय बनाया था। तब से यह वाक्य दुनिया भर में “जो होगा, देखा जाएगा” के भाव को व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे पहले भी नाराजगी जता चुके
इससे पहले पंजाब कांग्रेस में प्रधान पद पर बदलाव की चर्चाओं के बीच तिवारी ने कहा था- पंजाब कांग्रेस के भीतर सांगठनिक स्तर या नेतृत्व (प्रधान पद) में बदलाव को लेकर चल रही किसी भी प्रक्रिया या चर्चा में कांग्रेस आलाकमान की ओर से मुझसे कोई सलाह या राय नहीं ली गई है। उन्होंने कहा- मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि यदि आप किसी राज्य में संगठन को बदलना चाहते हैं या चुनाव की तैयारी करना चाहते हैं, तो सांगठनिक बदलाव चुनाव से कम से कम 2 साल पहले ही हो जाने चाहिए, ताकि नए नेतृत्व को जमीन पर काम करने का पर्याप्त समय मिल सके। चुनाव के बिल्कुल मुहाने पर आकर इस तरह के बड़े फैसले करने से केवल अनिश्चितता बढ़ती है।



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