चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सेक्टर-21डी निवासी विकास बिबरा के खिलाफ करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी डील में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिलस ने सेक्टर-44सी निवासी हरीश गौतम की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता हरीश गौतम ने बताया कि विकास बिबरा ने उन्हें सेक्टर-21 स्थित 500 वर्ग गज की कोठी बेचने की पेशकश की थी। मुलाकात के दौरान उसने कुछ दस्तावेज दिखाए और कहा कि 24 मार्च 2012 को इस मकान का बिक्री समझौता उसके नाम हुआ था। उसने यह भी दावा किया कि मकान का मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था और अदालत के फैसले के बाद उसे इस संपत्ति पर अधिकार मिल गया है। इसी भरोसे में आकर हरीश गौतम ने मकान खरीदने का सौदा किया। पुलिस आरोपी को नहीं पकड़ रही शिकायतकर्ता हरीश गौतम का कहना है कि उनके साथ करोड़ों रुपये की ठगी हुई है, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें ही बार-बार पुलिस थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस उनसे बार-बार अलग-अलग दस्तावेज मांग रही है, जबकि वह सभी जरूरी दस्तावेज पहले ही पुलिस को सौंप चुके हैं। हरीश गौतम का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है, पुलिस उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं कर रही। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने चंडीगढ़ जिला अदालत में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) की याचिका दायर की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने वह याचिका वापस ले ली। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि सिर्फ उनके साथ ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी हुई है। उन्होंने मामले में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। पुलिस नोटिस तक सीमित वहीं, जब जांच अधिकारी जतिंदर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आरोपियों को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया है। उन्हें दूसरा नोटिस भी भेजा गया है और आज पेश होना था, लेकिन आज वह स्वयं वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त हैं। जब जांच अधिकारी से पूछा गया कि धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों द्वारा गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) की याचिका दायर करने के बावजूद उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, तो इस सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। बोला पहली और दूसरी मंजिल पर कब्जा हरीश गौतम के मुताबिक, विकास बिबरा ने बताया कि वह मकान की पहली और दूसरी मंजिल पर कब्जे में है तथा जल्द ही ग्राउंड फ्लोर का कब्जा भी उसे मिल जाएगा। उसने भरोसा दिलाया कि पूरा मकान खरीदार को सौंप दिया जाएगा। इन दावों और दस्तावेजों पर विश्वास करते हुए 9 अगस्त 2023 को दोनों पक्षों के बीच 8 करोड़ 60 लाख रुपये में मकान बेचने का समझौता हुआ। एफआईआर के अनुसार, समझौते के तहत हरीश गौतम ने विकास बिबरा को पहले 1 करोड़ रुपये दिए थे। बदले में उन्हें मकान के ग्राउंड फ्लोर का कब्जा मिलना था। लेकिन पैसे लेने के बाद भी कब्जा नहीं दिया गया। बाद में विकास बिबरा ने कहा कि कानूनी वजहों से अभी ग्राउंड फ्लोर नहीं दिया जा सकता, इसलिए फिलहाल दूसरी मंजिल का कब्जा दे दिया जाएगा। इसके लिए 25 सितंबर 2023 को दोनों के बीच एक नया समझौता भी किया गया। हरीश गौतम ने पुलिस को दी शिकायत में कहा इसके बाद भी कब्जा नहीं मिला। उल्टा विकास बिबरा समय-समय पर और पैसे मांगता रहा तथा जल्द कब्जा देने का भरोसा देता रहा और उसने चेक के माध्यम से कुल 1 करोड़ 23 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। कब्जा देने पर टालमटोल करता रहा हरीश गौतम ने कई बार कब्जा देने की बात कही तो आरोपी ने टालमटोल शुरू कर दी। कई बार फोन नहीं उठाया गया और कभी उसकी पत्नी के माध्यम से बैठक की तारीख और समय तय करने का आश्वासन दिया जाता रहा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे लगातार अलग-अलग कहानियां सुनाई गईं, लेकिन न तो ग्राउंड फ्लोर का कब्जा मिला और न ही दूसरी मंजिल का। हरीश गौतम ने कहा उसने अपनी मेहनत की कमाई मकान खरीदने के लिए दी थी, लेकिन उसे न संपत्ति मिली और न ही पैसा वापस किया गया। इसलिए उसने पुलिस से हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने और आरोपी को बुलाकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। दूसरी शिकायत के बाद हुई कार्रवाई हरीश गौतम ने सबसे पहले 11 नवंबर 2024 को आईसीएमएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शुरुआत में जांच के दौरान शिकायतकर्ता के शामिल नहीं होने के कारण शिकायत बंद कर दी गई। बाद में उन्होंने दोबारा आवेदन दिया, जिसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की विस्तार से जांच की। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई। उनकी मंजूरी के बाद विकास बिबरा के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया।
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