मोगा में सात साल पुराने एक हाई-प्रोफाइल एनआरआई हत्या मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष अरोड़ा की अदालत ने मुख्य नामजद आरोपी जगतार सिंह उर्फ जग्गा को पुख्ता सबूतों और गवाहों के अभाव में बरी करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला शुक्रवार को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद सुनाया गया। इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से प्रसिद्ध कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट गगनदीप सिंह बराड़ ने अदालत में मजबूत पैरवी की। इंग्लैंड से लौटने के बाद नाले के पास मिला था शव यह सनसनीखेज मामला फरवरी 2019 का है। मूल रूप से मोगा के गांव घल्ल कलां के रहने वाले सुखदेव सिंह उर्फ सेमा लंबे समय तक इंग्लैंड (UK) में रहे थे। वे घटना से करीब दो-तीन महीने पहले ही वापस अपने पैतृक गांव लौटे थे। 5 फरवरी 2019 को सुखदेव सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए और बाद में उनका शव गांव के पास ही एक नाले के नजदीक से बरामद हुआ था। शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। भाभी के बयानों पर दर्ज हुआ था हत्या का मुकदमा घटना के बाद थाना सदर पुलिस ने मृतक सुखदेव सिंह की भाभी के बयानों के आधार पर कार्रवाई की थी। शिकायतकर्ता भाभी ने पुलिस को बताया था कि वह जब अपने मायके से वापस घर लौटीं, तो उनके जेठ सुखदेव सिंह घर पर मौजूद नहीं थे। इसी बीच उन्हें नाले के पास शव मिलने की सूचना मिली। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उन्होंने आखिरी बार अपने जेठ सुखदेव सिंह को गांव के ही जगतार सिंह उर्फ जग्गा (पुत्र नछत्तर सिंह) के साथ एक कार में सवार होकर जाते हुए देखा था। जमीन के पैसों के लेनदेन और कार खरीदने का था विवाद शिकायत में यह भी कहा गया था कि सुखदेव सिंह ने अपनी जमीन जगतार सिंह जग्गा को बेची थी। दोनों मोगा शहर में कार खरीदने जा रहे थे और जगतार ने भरोसा दिया था कि कार की डील फाइनल होते ही वह जमीन के बाकी पैसों का पूरा हिसाब-किताब चुकता कर देगा। पीड़ित परिवार का कहना था कि आरोपी जगतार सिंह जग्गा ने जमीन की मोटी रकम न देनी पड़े और उसे हड़पने की नीयत से ही सुखदेव सिंह की सुनियोजित तरीके से हत्या कर दी। इस आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत केस दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष नहीं पेश कर पाया ठोस सबूत, कोर्ट ने किया बरी अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी जगतार सिंह के खिलाफ लगे आरोपों को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों या चश्मदीद गवाहों के जरिए साबित करने में नाकाम रहा । आरोपी के वकील एडवोकेट गगनदीप सिंह बराड़ ने दलील दी कि पुलिस की कहानी केवल संदेह और सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थी, जिसका कोई पुख्ता आधार नहीं था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को अपर्याप्त और गवाहों की कड़ियों को कमजोर मानते हुए जगतार सिंह को बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया।
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मोगा में 7 साल पुराने NRI हत्याकांड का आरोपी बरी:इंग्लैंड से लौटे सुखदेव सिंह का नाले में मिला था शव, उनकी जमीन खरीदने वाले पर था आरोप
