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केतन अग्रवाल को न्याय दिलाने की मांग को लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर-17 प्लाजा में बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी पीड़ित के साथ उसके लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर जस्टिस फॉर केतन अग्रवाल के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह केवल एक व्यक्ति को न्याय दिलाने की लड़ाई नहीं, बल्कि निष्पक्ष न्याय व्यवस्था और समान अधिकारों की मांग से जुड़ा अभियान है। हर पीड़ित की आवाज सुनी जानी चाहिए प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि न्याय व्यवस्था में किसी भी पीड़ित के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हर पीड़ित की आवाज सुनी जानी चाहिए, चाहे वह पुरुष हो या महिला। न्याय का कोई जेंडर नहीं होता। जब तक केतन अग्रवाल को इंसाफ नहीं मिलता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा। निष्पक्ष जांच की उठाई मांग प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द उचित कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन का उद्देश्य लोगों और प्रशासन का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करना है। प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। पुलिस भी मौके पर मौजूद रही और पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। सोशल मीडिया पर भी चल रही मुहिम केतन अग्रवाल मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लगातार अभियान चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय नहीं मिलता, तब तक वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। क्या है केतन अग्रवाल मामला 18 जून 2026 को पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले की खाई में गिरने से मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे हादसा माना गया, लेकिन पुलिस जांच में तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर इसे सुनियोजित हत्या का मामला बताया गया। पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। इस घटना के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
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चंडीगढ़ में केतन अग्रवाल के समर्थन में प्रदर्शन:निष्पक्ष जांच की मांग; प्रदर्शनकारी बोले- न्याय का कोई जेंडर नहीं, कानून सभी के लिए समान







