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पंचकूला में मर्डर आरोपितों सिर मुंडवाने पर कोर्ट सख्त:पुलिस कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट; नंगे पैर घुमाने का भी आरोप




पंचकूला जिले के पिंजौर के चर्चित हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपियों द्वारा पुलिस हिरासत में प्रताड़ना, जबरन सिर मुंडवाने, नंगे पैर सार्वजनिक सड़कों पर चलाने और मीडिया के सामने अपमानित करने के आरोपों को लेकर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एसडीजेएम कालका अभिमन्यु राजपूत ने पंचकूला पुलिस कमिश्नर को पूरे मामले की विभागीय जांच कराने और रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी को कानून से अलग दंड देना, हिरासत में हिंसा करना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या मीडिया ट्रायल का हिस्सा बनाना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता। ऐसे कृत्य कानून के विरुद्ध हैं और उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। क्राइम ब्रांच, डिटेक्टिव स्टाफ, चंडीमंदिर के तत्कालीन प्रभारी ने कोर्ट में बयान देते हुए बताया कि क्राइम ब्रांच/सीआईए परिसर में कोई सीसीटीवी कैमरा स्थापित नहीं है, इसलिए वहां की कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है।” रोहित मेहता ने लगाया था आरोप मामला 5 जून 2026 को पिंजौर के मुख्य बाजार में हुई जितेश मनोचा उर्फ किट्टू की हत्या से जुड़ा है। इस मामले में छह नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपी रोहित मेहता ने कोर्ट में आवेदन देकर आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई, सिर मुंडवाए गए, नंगे पैर सड़क पर चलाया गया और उनकी तस्वीरें व वीडियो सार्वजनिक किए गए। उन्होंने मेडिकल बोर्ड से जांच, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। 3 आरोपियों के बॉडी पर साधारण चोटें कोर्ट ने इससे पहले तीन डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड का गठन कराया। मेडिकल रिपोर्ट में खुशदीप सिंह, रोहित मेहता और मनप्रीत सिंह के शरीर पर तीन से पांच दिन पुरानी कई साधारण चोटों का उल्लेख किया गया है, हालांकि एक्स-रे रिपोर्ट में किसी भी आरोपी की हड्डी टूटने की पुष्टि नहीं हुई। हिरासत से भागने में लगी चोट पुलिस ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दो आरोपियों को चोटें पुलिस हिरासत से भागने के प्रयास के दौरान लगी थीं, जिस संबंध में अलग एफआईआर भी दर्ज की गई है। पुलिस ने यह भी कहा कि बरामदगी और अन्य जांच कार्यों के लिए आरोपियों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाना आवश्यक था और उनका अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था। जबरन सिर मुंडाकर नहीं घुमाया जा सकता हालांकि कोर्ट ने कहा कि यह जांच का विषय है कि आरोपियों को जानबूझकर सिर मुंडवाकर सार्वजनिक रूप से घुमाया गया या नहीं। यदि ऐसा हुआ है, तो यह गंभीर मामला है और इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसी कारण पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित जांच में इस पहलू को भी शामिल किया जाए या अलग जांच कराकर समयबद्ध रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।



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