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नगर निगम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद मुनव्वर ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। उनके कांग्रेस में शामिल होते ही नगर निगम सदन में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। मुनव्वर के कांग्रेस में जाने के बाद कांग्रेस के पार्षदों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है, जबकि AAP के पास अब 8 पार्षद रह गए हैं। इस तरह कांग्रेस सदन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है और AAP तीसरे नंबर पर खिसक गई है। AAP से छिन सकता है नेता प्रतिपक्ष का पद अब तक आम आदमी पार्टी सदन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, इसलिए उसके पास नेता प्रतिपक्ष का पद था। कांग्रेस के पार्षदों की संख्या 9 होने के बाद पार्टी अब इस पद पर अपना दावा पेश करने की तैयारी में है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नियमों के अनुसार वह जल्द ही नगर निगम आयुक्त और मेयर के समक्ष नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए अपना दावा पेश करेगी। नगर निगम में मौजूदा दलीय स्थिति नगर निगम में कुल 35 निर्वाचित पार्षद हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ सांसद का एक पदेन वोट भी होता है। मौजूदा संख्या बल के अनुसार भाजपा के पास 18 पार्षद हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस के पास 9 और आम आदमी पार्टी के पास 8 पार्षद हैं। शिरोमणि अकाली दल का कोई पार्षद अब सदन में नहीं है। 2021 में 14 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी AAP 2021 के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 14 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में हुए लगातार दलबदल के कारण पार्टी का संख्या बल घटकर 8 रह गया है। वहीं, भाजपा ने भी विपक्षी दलों के पार्षदों को अपने साथ जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत की। 12 सीटों से शुरुआत करने वाली भाजपा अब 18 पार्षदों के साथ सदन की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। दलबदल से बदलता रहा नगर निगम का समीकरण 2021 के चुनाव के बाद कई पार्षदों ने दल बदले। कांग्रेस की हरप्रीत कौर बाबला भाजपा में शामिल हुईं। AAP की तरुणा मेहता कांग्रेस में गईं। कांग्रेस की वरिष्ठ पार्षद गुरबख्श रावत ने भाजपा का दामन थामा।AAP के पार्षद लखबीर सिंह बिल्लू भाजपा में शामिल हुए। अकाली दल के एकमात्र पार्षद हरदीप सिंह AAP में चले गए। इसके अलावा AAP के कई पार्षदों ने भी अलग-अलग समय पर भाजपा का रुख किया। पार्षद गुरचरणजीत सिंह काला का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चा में रहा। वह कांग्रेस से भाजपा, फिर AAP और उसके बाद दोबारा भाजपा में शामिल हुए। अब मुनव्वर के AAP छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने से नगर निगम सदन में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। कांग्रेस के दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AAP से नेता प्रतिपक्ष का पद छिनकर कांग्रेस के पास जाएगा।
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चंडीगढ़ के AAP पार्षद मुनव्वर कांग्रेस में शामिल:कांग्रेस बनी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी, AAP से छिन सकता है नेता प्रतिपक्ष का पद







