चंडीगढ़ के मलोया स्थित चार मंजिला आरसी-2 सरकारी हाई स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की गंभीर खामियां सामने आई हैं। पंजाब ह्यूमंस राइट्स कमीशन के मेंबर पद्मश्री जितेंद्र सिंह शंटी अचानक निरीक्षण करने स्कूल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने स्कूल की पूरी स्थिति का जायजा लिया और वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की, जो तेजी से वायरल हो रही है। निरीक्षण के दौरान शंटी ने सबसे पहले स्कूल प्रिंसिपल कृष्ण मोहन को बुलाया और स्कूल के बारे में जानकारी ली। प्रिंसिपल ने बताया कि यह गवर्नमेंट हाई स्कूल है, जो दसवीं तक का है। इसके बाद शंटी प्रिंसिपल को साथ लेकर स्कूल के बाथरूम पहुंचे, जहां टॉयलेट्स की हालत बेहद खराब मिली। उन्होंने देखा कि टॉयलेट्स में काफी गंदगी फैली हुई थी और दरवाजे नीचे से टूटे हुए थे। खासकर लड़कियों के वॉशरूम में यह स्थिति ज्यादा चिंताजनक थी। शंटी ने कहा कि अगर कोई अनहोनी हो जाए या कोई मोबाइल से वीडियो बनाकर वायरल कर दे, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति बनने से पहले इसे रोका क्यों नहीं गया। पानी भरा मिला, बीमारियों का खतरा टॉयलेट्स के निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर गंदा पानी जमा मिला, जिससे पूरे परिसर में बदबू फैली हुई थी। फर्श पर फिसलन थी और साफ-सफाई का लंबे समय से अभाव साफ नजर आ रहा था। इस स्थिति को देखते हुए पद्मश्री जितेंद्र सिंह शंटी ने गंभीर चिंता जताई और कहा कि इस तरह गंदा पानी जमा रहने से मच्छर पनपते हैं और डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे-छोटे बच्चे रोजाना इन टॉयलेट्स का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में यह उनके स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। शंटी ने मौके पर ही सफाई कर्मचारी को बुलाने के निर्देश दिए। कुछ समय बाद एक महिला सफाई कर्मचारी वहां पहुंची, जिससे शंटी ने सख्त लहजे में पूछा कि टॉयलेट्स की नियमित सफाई क्यों नहीं हो रही है और यहां इतनी गंदगी क्यों है। उन्होंने यह भी पूछा कि सफाई का कोई शेड्यूल है या नहीं और आखिरी बार कब सफाई की गई थी। हालांकि सफाई कर्मचारी इन सवालों का कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी और इधर-उधर की बातें करती नजर आई। इस पर शंटी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब सफाई कर्मियों को हर महीने वेतन दिया जा रहा है, तो काम में इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से भी जवाब मांगा कि आखिर सफाई व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है और इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो रही है। हर मंजिल पर एक जैसी हालत, दरवाजे ऊपर-नीचे से टूटे इसके बाद पद्मश्री जितेंद्र सिंह शंटी स्कूल की पहली मंजिल पर पहुंचे और वहां स्थित टॉयलेट्स का भी बारीकी से निरीक्षण किया। लेकिन यहां भी हालात पहले जैसी ही खराब मिले। टॉयलेट्स में गंदगी साफ नजर आ रही थी, फर्श पर दाग-धब्बे और बदबू फैली हुई थी, जिससे यह स्पष्ट था कि काफी समय से ठीक तरीके से सफाई नहीं हुई है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कई टॉयलेट्स के दरवाजे नीचे से टूटे हुए थे, जिससे अंदर बैठे व्यक्ति की प्राइवेसी पूरी तरह खत्म हो रही थी। इतना ही नहीं, एक दरवाजा ऊपर से भी टूटा हुआ था, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि खासकर लड़कियों के लिए यह स्थिति बेहद असुरक्षित है और किसी भी समय कोई अप्रिय घटना हो सकती है। बाथरूम की छत भी काफी जर्जर हालत में नजर आई। जगह-जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ था और छत कमजोर दिखाई दे रही थी, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। शंटी ने कहा कि अगर छत का कोई हिस्सा गिर जाता है, तो बच्चों को गंभीर चोट लग सकती है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा। इन सभी खामियों को देखकर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंडीगढ़ को देश का स्मार्ट सिटी बताया जाता है और यहां विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड भी उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्कूलों की ऐसी हालत होना बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर समस्याओं के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। पेरेंट्स ने भी की शिकायत, नहीं मिला समाधान निरीक्षण के दौरान कुछ बच्चों के पेरेंटस भी स्कूल में मौजूद थे। शंटी ने उनसे बातचीत की और एक महिला से पूछा कि क्या उन्होंने स्कूल के बाथरूम देखे हैं। महिला ने बताया कि उन्होंने पहले भी इस बारे में टीचर से शिकायत की थी, लेकिन उन्हें हेड ऑफिस जाकर शिकायत करने को कहा गया। हालांकि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि हेड ऑफिस कहां है। इस पर शंटी ने कहा कि यह स्कूल की जिम्मेदारी है, हेड ऑफिस की नहीं। अगर स्कूल प्रबंधन खुद समस्या का समाधान नहीं कर सकता, तो उसे लिखकर ऊपर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सफाई कर्मियों को हर महीने वेतन दिया जाता है, वे मुफ्त में काम नहीं कर रहे। फायर सेफ्टी सिस्टम भी फेल निरीक्षण के दौरान फायर सेफ्टी सिस्टम की भी जांच की गई। जब शंटी ने स्टाफ से फायर सेफ्टी पाइप चलाने को कहा, तो वह काम नहीं कर पाया। स्टाफ ने बताया कि शायद ऊपर से बंद है। इस पर शंटी ने सवाल उठाया कि अगर स्कूल में अचानक आग लग जाए तो क्या उस समय ऊपर जाकर इसे चालू करेंगे। स्टाफ ने बताया कि करीब तीन महीने पहले ही फायर सेफ्टी उपकरण लगाए गए हैं, लेकिन अभी पूरी तरह से चालू नहीं हुए हैं और संबंधित विभाग से अनुमति भी नहीं मिली है। इस पर शंटी ने कहा कि क्या ये उपकरण सिर्फ दिखावे के लिए लगाए गए हैं। अगर किसी अनहोनी की स्थिति बनती है, तो इससे कैसे निपटा जाएगा। 2000 बच्चों की सुरक्षा पर सवाल शंटी ने मौके पर मौजूद स्टाफ और प्रबंधन को संबोधित करते हुए कहा कि इस स्कूल में करीब 2000 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और इतने बड़े स्तर पर बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की बनती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब अभिभावक अपने बच्चों को रोजाना स्कूल भेजते हैं, तो वे यह भरोसा करते हैं कि यहां उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिलेगा, लेकिन जिस तरह की लापरवाही यहां देखने को मिल रही है, वह इस भरोसे को तोड़ने वाली है। उन्होंने कहा कि टॉयलेट्स की गंदगी, टूटे हुए दरवाजे, जर्जर छत और फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं में खामियां सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। अगर इन कमियों के कारण कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल नहीं होगा और स्कूल प्रशासन को जवाब देना पड़ेगा। शंटी ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चे रोजाना इन सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में नियमित निरीक्षण और रखरखाव बेहद जरूरी है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इस तरह की लापरवाही को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया स्टाफ को बोला खुद जाकर करें जांच निरीक्षण के बाद शंटी ने सभी स्कूल स्टाफ को बुलाकर उनसे बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या वे कभी बच्चों के बाथरूम में गए हैं। स्टाफ ने जवाब दिया कि वे वहां नहीं जाते। इस पर शंटी ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें खुद जाकर बाथरूम की स्थिति देखनी चाहिए, ताकि उन्हें पता चले कि बच्चे किन हालात में उनका उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल के भरोसे भेजते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सुविधाओं की जिम्मेदारी स्कूल की है। साथ ही उन्होंने बाथरूम की जर्जर छत को लेकर भी प्रिंसिपल से सवाल किए और जल्द सुधार के निर्देश दिए।
Source link
