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गुरुग्राम में जलभराव रोकने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग का सहारा:मानसून से एक सप्ताह पहले काम शुरू, पायलट प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी दिल्ली का सहयोग मिला




गुरुग्राम में मानसून से एक सप्ताह पहले प्रशासन को जलभराव रोकने के कार्यों की याद आ रही है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने पायलट आधार पर दो एक्वीफर आधारित रेन वाटर हार्वेस्टिंग के निर्माण का कार्य शुरू किया है। यह परियोजना आईआईटी दिल्ली के सहयोग से शुरू की गई है। इन प्रोजेक्ट के शुरू होने से मानसून के दौरान जलभराव को कम करने के साथ-साथ भूजल को रिचार्ज किया जाएगा। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने कहा कि शहर में जल निकासी व्यवस्था को अधिक सक्षम एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। एक्वीफर आधारित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट सेक्टर-54 स्थित एआईटी चौक के निकट स्मृति वाटिका पार्क तथा सेक्टर-31 में बनाया जा रहा है। आईआईटी दिल्ली के एक्सपर्ट की निगरानी इन स्ट्रक्चरों का डिजाइन आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है तथा इनका निर्माण कार्य संस्थान के रिसर्च स्कॉलरों की देख रेख में किया जा रहा है । स्मृति वाटिका पार्क में लगभग 480-480 फीट गहराई के दो रिचार्ज बोरवेल का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जिनके माध्यम से वर्षा जल को भूजल स्तर तक पहुंचाया जाएगा। वहीं सेक्टर-31 में लगभग 500 फीट गहरा रिचार्ज बोरवेल तैयार कर आवश्यक रिचार्ज स्ट्रक्चर भी स्थापित किया गया है। वैज्ञानिक तरीके से ज़मीन के अंदर पहुंचाया पानी इन स्ट्रक्चरों का निर्माण मास्टर सड़कों एवं ग्रीन बेल्ट के किनारे किया जा रहा है ताकि मानसून के दौरान आने वाले वर्षा जल को एकत्रित कर वैज्ञानिक तरीके से ज़मीन के अंदर पहुंचाया जा सके। एकत्रित वर्षा जल को फिल्टर करने के बाद भूमिगत चिन्हित मोटी बजरी (कोर्स ग्रेवल) एवं दरारयुक्त एक्वीफर परतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भूजल का प्रभावी रिचार्ज होगा। साथ ही सड़कों पर वर्षा जल का बहाव एवं अस्थायी जलभराव भी कम होगा। पूरे शहर में बनेंगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम उन्होंने कहा कि यह परियोजना जलभराव संभावित क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और शहरी जल निकासी प्रबंधन के एकीकृत मॉडल के रूप में कार्य करेगी। पायलट परियोजना के परिणामों और प्रभावशीलता के आधार पर जीएमडीए शहर के अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार के स्ट्रक्चर विकसित करेगा। यह पायलट परियोजना जीएमडीए की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सेक्टर-1 से 57 तक के क्षेत्र में कुल पांच एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जानी हैं।



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