गुरुग्राम में एक रिटायर्ड मेजर के वायरल वीडियो के बाद ट्रैफिक पुलिस ने मंगलवार को डैमेज कंट्रोल किया। DCP ट्रैफिक प्रतीक गहलोत ने रिटायर मेजर हेतेंद्र के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। DCP ने कहा कि मेजर के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। नाके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने कोई बदसलूकी नहीं की। कानून के तहत बिल्कुल सही चालान किया गया। DCP ने कहा कि अगर गाड़ी में बच्चे और महिलाएं है, तब भी ड्रिंक ड्राइव के मामलों में कोई छूट नहीं दी जा सकती और पुलिस कमिश्नर ने इस तरह के कोई निर्देश जारी नहीं किए। यह निर्देश केवल आम मामलों में लागू होता है। पुलिस ने मेजर हेतेंद्र को भी बुलाया और उनके सामने स्थिति स्पष्ट कर दी। जिसके बाद मेजर ने कहा कि यह फेयर इन्क्वावरी नहीं है, मैं पुलिस कमिश्नर से मिलूंगा। पुलिस का डैमेज कंट्रोल सेना के मेजर के साथ कथित दुर्व्यवहार की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गुरुग्राम पुलिस की छवि पर सवाल उठने लगे थे। आम जनता और पूर्व सैनिकों के संगठनों में नाराजगी को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला। DCP ट्रैफिक का यह बयान और पुलिस कमिश्नर के नियमों की दुहाई देना इसी डैमेज कंट्रोल का हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस यह संदेश देना चाहती है कि उनकी कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण नहीं, बल्कि नियमबद्ध थी। अपने कर्मचारियों को बचा रही पुलिस हेतेंद्र ने अधिकारियों से मिलने के बाद कहा कि मैंने शराब नहीं पी थी और गलत तरीके से उनका न केवल चालान किया गया, बल्कि प्रताड़ित भी किया। अब पुलिस अधिकारी अपने कर्मचारियों को बचा रहे हैं। जरूरत पड़ी तो वे इसको लेकर पुलिस कमिश्नर से भी मिलने जाएंगे। बेटियां पूछ रही- पापा आपने ड्रिंक कब की उन्होंने बताया कि इस सारे विवाद के बाद बेटियां ये पूछ रही हैं कि पापा आप तो शाम से हमारे साथ थे, फिर आपने शराब कब पी। उन्होंने शराब तो पी ही नहीं, अब पुलिस ने किस वजह से चालान काटा यह समझ से परे हैं। बदतमीजी नहीं, सही कार्रवाई हुई DCP ट्रैफिक ने कहा कि शुरुआती जांच और मौके पर मौजूद साक्ष्यों के अनुसार, पुलिसकर्मियों की ओर से किसी भी तरह की अमर्यादित भाषा या बदसलूकी का इस्तेमाल नहीं किया गया। पुलिस दल केवल अपनी ड्यूटी कर रहा था। मेजर की गाड़ी का चालान नियमों के उल्लंघन के आधार पर किया गया था, जो पूरी तरह से कानून सम्मत है। पुलिस का कहना है कि कानून के सामने हर नागरिक बराबर है, चाहे उसका पद या पृष्ठभूमि कुछ भी हो। ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने केवल यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराया। नियमों में कोई रियायत नहीं पुलिस कमिश्नर के कड़े निर्देशों का हवाला देते हुए DCP ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा के मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन में महिलाएं या बच्चे सवार हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उस वाहन को यातायात नियमों को तोड़ने की अनुमति मिल जाएगी। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन और भी जरूरी हो जाता है। इसलिए, ऐसी स्थिति में चालान या दंडात्मक कार्रवाई से कोई छूट नहीं दी जा सकती। DCP बोले- एसओपी के तहत की गई कार्रवाई तीन दिन नाके लगाए जाते हैं: पुलिस आयुक्त द्वारा एक SOP पहले से ही तैयार की गई है जिसमें आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए अल्कोहल चेकिंग प्रत्येक सप्ताह अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले सड़क मार्गों पर बुधवार, शुक्रवार व शनिवार को समय रात्रि 10 बजे से 1 बजे तक लगाई जाती है। बॉडी वॉर्न कैमरा इस्तेमाल किया: इस दौरान चेकिंग जोनल अधिकारी को SOP के दिशा निर्देश अनुसार बॉडी वॉर्न कैमरा लगाना अनिवार्य होता है ताकि चालान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके और चालान के दौरान प्रत्येक गतिविधि को रिकॉर्ड किया जा सके। अल्कोहल चेकिंग के दौरान प्रत्येक वाहन ड्राइवर की चेकिंग के लिए एल्कोहल सेंसर पर प्रत्येक बार नई पाईप का इस्तेमाल किया जाता है। जांच में पुलिसकर्मी निर्दोष: 6 जून की रात्रि लगभग 12:00 बजे रिटायर मेजर के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार करने व गलत चालान करने के संबंध में एसीपी ट्रैफिक हेडक्वार्टर सतपाल यादव के द्वारा जांच की गई। जो प्रथमदृष्टया ट्रैफिक जोनल अधिकारी द्वारा अल्कोहल चेकिंग के दौरान लगाए गए बॉडी वॉर्न कैमरा की जांच की गई। उनके आधार पर पाया कि उस दिन अल्कोहल चेकिंग के दौरान यातायात पुलिस गुरुग्राम अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा एल्कोसेंसर मशीन की 91 मात्र आने पर वाहन ड्राइवर का MV एक्ट के तहत नियम अनुसार चालान किया गया है। इसके अलावा मेजर व उसके परिवार के सदस्यों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं होना पाया गया।
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