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पंजाब में गलत ई-चालान कटने पर अब वाहन मालिकों की सुनवाई होगी। सरकार ने हर जिले में जिला शिकायत निवारण सेल बनाने का फैसला किया है। अब कोई भी व्यक्ति 45 दिनों के भीतर अपने ई-चालान को चुनौती दे सकेगा। इसके लिए डैशकैम फुटेज, फोटो, वीडियो क्लिप या अन्य सबूत जमा किए जा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे ई-चालान व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिकों के लिए आसान बनेगी। पंजाब के ट्रांसपोर्ट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह खुलासा किया। उन्होंने साफ किया है कि अगर नाबालिग वाहन चलाता पकड़ा जाता है, तो माता पिता पर एक्शन होगा। सरकार द्वारा लिए गए छह अहम फैसलों को जानिए गलत चालान पर 45 दिन में करें शिकायत: अगर आपका ई-चालान गलत कटा है, तो आप 45 दिनों के अंदर ज़िले के नए ‘शिकायत निवारण सेल’ में अपील कर सकते हैं। इसके लिए आप डैशकैम फुटेज, फोटो या वीडियो का सबूत दे सकते हैं। पता और मालिकाना हक न बदलने पर जुर्माना: घर का पता बदलने पर 30 दिन के भीतर गाड़ी के कागज़ात अपडेट कराने होंगे। गाड़ी बेचने या खरीदने पर भी तय समय सीमा (पंजाब में 14 दिन, राज्य से बाहर 45 दिन) के अंदर नाम ट्रांसफर कराना अनिवार्य है। नियम न मानने पर पहली बार ₹500 और आगे हर बार ₹1,500 जुर्माना लगेगा। खतरनाक ड्राइविंग पर अब सीधा कोर्ट केस (मौके पर निपटारा नहीं): रेड लाइट तोड़ना, स्टॉप साइन की अनदेखी, रॉन्ग साइड (उल्टी दिशा) में गाड़ी चलाना, या शराब/नशे में ड्राइविंग करने जैसे खतरनाक अपराधों को गैर-समझौतायोग्य (Non-compoundable) बना दिया गया है। यानी अब केवल मौके पर जुर्माना भरकर मामला रफा-दफा नहीं होगा, बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। नाबालिग के गाड़ी चलाने पर माता-पिता/मालिक जिम्मेदार: अगर कोई नाबालिग (अंडरएज) गाड़ी या बाइक चलाता पकड़ा गया, तो उसके माता-पिता, अभिभावक या गाड़ी के मालिक के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी और भारी जुर्माना लगाया जाएगा। नाबालिग का लाइसेंस 25 साल की उम्र तक ब्लॉक: नियम तोड़ने वाले नाबालिग का ड्राइविंग लाइसेंस 25 वर्ष की उम्र पूरी होने तक नहीं बनेगा, और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन (आरसी) भी तुरंत रद्द किया जा सकता है। हर ज़िले में बना विशेष ग्रीवांस सेल (शिकायत केंद्र): ट्रैफिक और चालान संबंधी विवादों को तुरंत सुलझाने के लिए पंजाब के हर ज़िले में एक अलग ‘जिला शिकायत निवारण सेल’ स्थापित कर दिया गया है। सरकार ने ये फैसले इसलिए जरूरी सड़क हादसों और मौतों में बढ़ोतरी: पंजाब में हर साल औसतन 4,800 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं (यानी रोज़ाना लगभग 13 मौतें)। चिंता की बात यह है कि देश के बाकी राज्यों की तुलना में पंजाब में दुर्घटनाओं से घायल होने वालों से ज्यादा मौतों का अनुपात (Fatality Rate) अधिक है। नाबालिगों की लापरवाही पर अंकुश: अक्सर देखा गया है कि स्कूली या कम उम्र के बच्चे बिना लाइसेंस तेज रफ्तार में गाड़ियां और बाइक चलाते हैं, जिससे खुद उनकी और दूसरों की जान को गंभीर खतरा रहता है। पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम: स्वचालित कैमरे (AI कैमरों) से आए दिन गलत ई-चालान कटने की शिकायतें आ रही थीं। ज़िला स्तर पर ‘ग्रीवांस सेल’ (शिकायत केंद्र) बनने से आम जनता को परेशान नहीं होना पड़ेगा और वे गलत चालान को आसानी से रद्द करवा सकेंगे। अपराध और सुरक्षा (क्राइम कंट्रोल): सेकंड-हैंड गाड़ियां बिकने के बाद नाम ट्रांसफर न कराने से अपराधी या असामाजिक तत्व ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल अपराधों में करते हैं और असली मालिक फंस जाता है। इसलिए 30 से 45 दिनों में आरसी (RC) अपडेट कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
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गलत ई-चालान कटा तो मिलेगा चुनौती देने का मौका:पंजाब सरकार का फैसला, 45 दिन का समय, नाबालिग ने गाड़ी चलाई तो माता-पिता पर कार्रवाई







