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कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा में नीमवाला की राइस मिल में धान के स्टॉक में गड़बड़ी मिलने के मामले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दो अधिकारियों पर गाज गिरी है। विभाग ने पिहोवा में तैनात AFSO और इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया है। खास बात यह है कि जिस इंस्पेक्टर पर कार्रवाई हुई, उसी ने राइस मिल के खिलाफ केस दर्ज कराया था। विभाग के मुताबिक, चौधरी राइस मिल फिजिकल वेरिफिकेशन (PV) के दौरान धान स्टॉक में भारी कमी मिलने से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि मिल में 24,318.75 क्विंटल धान कम मिला, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5.81 आंकी गई है। यह कीमत MSP के मुताबिक थी। 39 हजार क्विंटल से ज्यादा धान बांटा पिछले सीजन में विभाग ने चौधरी राइस मिल को कस्टम मिलिंग के लिए करीब 39 हजार क्विंटल धान दिया था। इस धान से तैयार चावल (सीएमआर) की आपूर्ति मिलर को भारतीय खाद्य निगम (FCI) को करनी थी। 25 नवंबर को मुख्यालय की गठित टीम ने AFSO करनाल की अध्यक्षता में मिल की PV की थी। उस समय रिकॉर्ड और स्टॉक में कोई कमी नहीं पाई गई थी। दूसरी जांच में कम मिला धान इस साल 17 मार्च को डीएफएससी कार्यालय के निर्देश पर ASFO शाहाबाद राजीव सैनी और आईएफएस गौरव अरोड़ा की टीम ने दोबारा फिजिकल वेरिफिकेशन की। जांच के दौरान मिल में करीब 24 हजार क्विंटल धान कम मिला। स्टॉक में इतनी बड़ी कमी सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा ने दर्ज करवाई FIR स्टॉक में कमी मिलने के बाद डीएफएससी कार्यालय के आदेश पर पिहोवा इंचार्ज इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा ने 17 मार्च को चौधरी राइस मिल के खिलाफ केस दर्ज कराया था। हालांकि बाद में विभागीय जांच में सवाल उठे कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में धान गायब होने की जानकारी समय रहते विभाग को क्यों नहीं मिली और निगरानी व्यवस्था कैसे फेल हुई। हर 15 दिन में देनी होती है रिपोर्ट नियमों के अनुसार कस्टम मिलिंग के लिए दिए गए धान स्टॉक की निगरानी संबंधित इंचार्ज अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। इसके तहत हर 15 दिन में स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन कर रिपोर्ट विभाग को भेजनी होती है। चौधरी राइस मिल के मामले में यह पाक्षिक रिपोर्ट नियमित रूप से जमा नहीं कराई गई। नवंबर में धान आवंटित होने के बाद से लेकर मार्च तक स्टॉक की निगरानी संबंधी रिपोर्टों को लेकर सवाल खड़े हुए। मार्च में नोटिस दिया गया स्टॉक में कमी सामने आने के बाद डीएफएससी नरेश कुमार ने 20 मार्च को इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा और एएफएसओ जसबीर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में पूछा गया कि निर्धारित समय पर फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट क्यों जमा नहीं कराई गई। इसके बाद 2 अप्रैल को डीएफएससी ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभाग के डायरेक्टर को शिकायत भेजी गई। दोनों को किया सस्पेंड शिकायत में फिजिकल वेरिफिकेशन और निगरानी में लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा के बाद इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा और एएफएसओ जसबीर सिंह को सस्पेंड कर दिया। उधर, इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा ने कहा कि उनकी ओर से नियमित रूप से फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है। कल राज्यमंत्री से मिले थे किसान भाकियू पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने कहा कि इस मामले को लेकर राज्यमंत्री राजेश नागर से मिलकर ज्ञापन दिया। राज्यमंत्री के आदेश के बाद ASFO और इंस्पेक्टर पर कार्रवाई की गई। विभाग से दोनों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग रखी है।
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कुरुक्षेत्र राइस घोटाले में AFSO और इंस्पेक्टर सस्पेंड:24 हजार क्विंटल धान मिला कम, निगरानी में बरती लापरवाही, पाक्षिक रिपोर्ट नहीं देने पर एक्शन







