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करनाल जिले में सामने आए करीब 35 करोड़ रुपये के धान घोटाले में एसआईटी ने जांच तेज करते हुए कई अहम गिरफ्तारियां की हैं। जांच के दौरान फर्जी गेटपास, कम स्टॉक और मिलीभगत के जरिए सरकारी धान के गबन का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक ओर जहां बड़ी रकम की रिकवरी की है, वहीं जुड़े अधिकारियों, आढ़तियों और मिलरों पर लगातार कार्रवाई जारी है। डीएफएससी से पूछताछ, हाईकोर्ट के आदेश पर छोड़ा
जांच के दायरे में आए तत्कालीन जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक अनिल कुमार को एसआईटी ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के चलते उन्हें जांच में शामिल कर छोड़ दिया गया। जांच में सामने आया कि धान घोटाले के दौरान हुई लेनदेन में उनका भी हिस्सा होने के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर उनसे पूछताछ की गई। मिलर से 2.47 करोड़ की रिकवरी, जेल भेजा गया
बुटाना थाना क्षेत्र के शेखपुरा खालसा स्थित यूनाइटेड फूड राइस मिल में 2.61 करोड़ रुपये के करीब 1000 टन धान के गबन का मामला सामने आया था। इस मामले में मिल मालिक नसीब सिंह और उनकी पत्नी संतोष के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए नसीब सिंह से पुलिस ने 2.47 करोड़ रुपये की रिकवरी करवाई, जिसे विभाग में जमा करा दिया गया। इसके बाद आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसे अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी माना जा रहा है। निरीक्षक की गिरफ्तारी से खुली मिलीभगत की परतें
मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक रणधीर को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उसने बताया कि गबन की रकम में से हिस्सा तत्कालीन डीएफएससी तक भी पहुंचा था। इसी खुलासे के बाद जांच का दायरा और बढ़ा और कई अन्य नाम सामने आए। तरावड़ी मंडी में फर्जी गेटपास का खेल
तरावड़ी थाना में दर्ज मामले में कृष्ण पाल सुमित कुमार फर्म के आढ़ती सुमित शर्मा को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने बिना धान भेजे ही फर्जी गेटपास के जरिए मंडी से मिल में धान भेजा दिखाया। पुलिस ने आरोपी से संबंधित पूरा रिकॉर्ड बरामद कर लिया है और उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया। स्टॉक जांच में सामने आई भारी कमी
27 अक्तूबर को सांभली स्थित बीआरसी ओवरसीज में धान के स्टॉक की जांच की गई थी। जांच में 59049 बोरी धान यानी 2538.720 मीट्रिक टन और 1742 मीट्रिक टन चावल मिला, जो 2600 मीट्रिक टन धान के बराबर था। जबकि रिकॉर्ड में 159833 बोरी धान दिखाया गया था। इस तरह करीब 855 मीट्रिक टन धान की कमी पाई गई। इस मामले में 6 फरवरी को खाद्य आपूर्ति निरीक्षक देवेंद्र को गिरफ्तार किया गया था। अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई, एक निलंबित
इसी प्रकरण में मार्केट कमेटी सचिव संजीव सचदेवा और खाद्य आपूर्ति विभाग के सहायक निरीक्षक रामफल के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ था। विभाग ने रामफल को निलंबित कर दिया था। जांच में लगातार नए तथ्यों के सामने आने पर अब आढ़ती सुमित शर्मा की गिरफ्तारी की गई है। करनाल मंडी में भी फर्जीवाड़ा, आढ़ती गिरफ्तार
नई अनाज मंडी करनाल में हुए फर्जी गेटपास मामले में जसविंद्र सिंह मुल्तान सिंह फर्म के आढ़ती जसविंद्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने मंडी में धान आए बिना ही गेटपास कटवाए। इस काम में तत्कालीन सचिव आशा रानी, मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली और ऑक्शन रिकॉर्डर यशपाल की मिलीभगत सामने आई है। जांच के दौरान एक आरोपी की मौत
इस मामले में पहले ही छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान न्यायिक हिरासत में पंकज तुली की तबीयत बिगड़ने से मौत हो चुकी है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर घोटाले की गहराई तक पहुंचने में जुटी है। बचे हुए धान का भी किया गया निपटान
मिल मालिक नसीब सिंह ने मिल में बचा हुआ धान भी विभाग के आदेशानुसार अन्य मिलों को आवंटित कर दिया है। एसआईटी का कहना है कि आगे भी इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं और जांच जारी है।
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करनाल 35 करोड़ धान घोटाले में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई:DFSC सहित आढ़ती और मिलर पर शिकंजा,2.47 करोड़ की बरामदगी, फर्जी गेटपास और कमी स्टॉक से खुला घोटाले का जाल







