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करनाल में कृषि मंत्री ने राहुल गांधी पर साधा निशाना:बोले- "ना देसी, ना विलायती, बीच से का माल", अजीब सा नेता




हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने शिक्षा बिल संशोधन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी का बयान टीवी पर देखा है और उन्हें “अजीब सा नेता” बताते हुए कहा कि “ना तो वे देसी हैं और ना ही पूरी तरह विलायती, बीच से का माल हैं।” मंत्री ने यह टिप्पणी करनाल में कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान की, जहां उन्होंने किसानों के मुद्दों, प्राकृतिक खेती, यूरिया के उपयोग, पेस्टीसाइड के प्रभाव और नीट पेपर लीक जैसे विषयों पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। शंभू बॉर्डर धरने पर सरकार का रुख बुधवार को करनाल में आयोजित जिला कष्ण निवारण समिति की बैठक में कृषि मंत्री ने 13 समस्याएं सुनी, जिसमें 5 का समाधान किया गया और 7 पेडिंग रखी गई। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने शंभू बॉर्डर पर किसानों के धरने के मुद्दे पर कहा कि मुख्यमंत्री नायब सैनी के निर्देश पर वे स्वयं मौके पर गए थे। वहां किसानों से बातचीत कर उनकी मांगों का ज्ञापन लिया गया। मंत्री के अनुसार, किसानों की प्रमुख मांगों को सरकार ने स्वीकार किया, जिसके बाद धरना समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और संवाद के जरिए समाधान निकालना ही प्राथमिकता है। मक्का उत्पादन से किसान और सरकार दोनों को फायदा मक्के की बंपर आवक को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि मक्का एक ग्रीष्मकालीन फसल है और इस बार इसकी खेती बेहद सफल रही है। इससे किसानों को अच्छा लाभ मिला है और सरकार को भी फायदा हुआ है। उन्होंने बताया कि साल में अब तीसरी फसल का चलन बढ़ रहा है-पहले जीरी, फिर आलू या सरसों और उसके बाद मक्का। मक्के से मिलने वाली आमदनी अब किसानों के लिए अगली फसल की तैयारी में सहायक बनेगी। यूरिया और पेस्टीसाइड पर उठाए सवाल यूरिया की बढ़ती मांग पर उन्होंने कहा कि यूरिया से पौधों को नाइट्रोजन मिलती है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह नाइट्रोजन पौधों तक कैसे पहुंचेगी। इसे समझाने के लिए उन्होंने रसोई का उदाहरण दिया- “रसोई में सारा सामान हो, लेकिन खाना बनाने वाला रसोइया न हो तो खाना नहीं बनेगा।” उन्होंने कहा कि खेत में यही भूमिका जीवाणु निभाते हैं, जो खाद और पेस्टीसाइड के अधिक उपयोग से मर रहे हैं। श्याम सिंह राणा ने कहा कि पेस्टीसाइड और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है। इससे खेत में मौजूद प्राकृतिक जीव जैसे सांप, मेंढक और अन्य जीव भी खत्म हो रहे हैं, जिससे मिट्टी सख्त और जहरीली हो रही है। ऐसे में जो अनाज पैदा हो रहा है, वह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जितना ज्यादा यूरिया का उपयोग होगा, उतना ही अनाज में जहरीलापन बढ़ेगा। ट्रेड डील और अनाज के मानकों पर सफाई किसानों द्वारा उठाए गए इस सवाल पर कि ट्रेड डील के चलते पेस्टीसाइड की मात्रा के कारण भारतीय अनाज अंतरराष्ट्रीय मानकों से बाहर हो सकता है, पर मंत्री ने पत्रकार से ही सवाल करते हुए कहा कि “आपको किसने कहा कि अनाज का कोई एग्रीमेंट हुआ है?” उन्होंने कहा कि जो भी समझौता होगा, वह किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा और ऐसा कोई भी करार नहीं होगा जिससे किसानों को नुकसान पहुंचे। प्राकृतिक खेती और देसी गाय पर जोर उन्होंने ने किसानों से अपील की कि वे पेस्टीसाइड का उपयोग कम करें और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें। उन्होंने देसी गाय के गोबर के महत्व को बताते हुए कहा कि एक ग्राम गोबर में लगभग 300 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं, जो खेत के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ये बैक्टीरिया पौधों के लिए भोजन तैयार करने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार देसी गाय पर 30 हजार रुपए की सब्सिडी दे रही है। इससे गोबर गैस प्लांट भी चल सकता है और खेती भी की जा सकती है। मंत्री के अनुसार एक देसी गाय के जरिए 40 एकड़ तक की खेती संभव है। उन्होंने इसे कर्जमुक्त और आत्मनिर्भर खेती का मॉडल बताते हुए कहा कि इसमें बाजार से किसी भी बाहरी सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती। नीट पेपर लीक पर केंद्र सरकार का रुख नीट पेपर लीक के मामले पर मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि पहले भी विभिन्न सरकारों के दौरान पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन अब इसका स्थायी समाधान निकालने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने विश्वास जताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। 13 मामलों की सुनवाई, 7 पेंडिंग बैठक के दौरान कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कुल 13 मामलों की सुनवाई की। इनमें से 5 मामलों का मौके पर समाधान कर दिया गया, जबकि 7 मामलों को अगली बैठक के लिए लंबित रखा गया। मंत्री ने कहा कि हर मामले में दोनों पक्षों की बात सुनकर उन्हें संतुष्ट करना जरूरी होता है, इसलिए कुछ मामलों में समय लगता है और उन्हें अगली बैठक में लिया जाता है।



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