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करनाल की घरौंडा मंडी में बड़ा खेल उजागर:यूपी का गेहूं हरियाणा के किसानों के नाम पर बिक रहा मंडी में,आढ़तियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप




करनाल जिला की घरौंडा अनाज मंडी में गेहूं खरीद को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश से सस्ते दामों पर गेहूं लाकर उसे हरियाणा के किसानों के नाम पर एमएसपी पर बेचा जा रहा है। मामले ने तूल तब पकड़ा जब मंडी में आई दो ट्रालियों को रोककर जांच की गई और विवाद खड़ा हो गया। इस पूरे मामले में आढ़तियों और मार्केट कमेटी कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप लगे हैं। आढ़ती और मंडी सुपरवाइजर के बीच तीखी बहस हो गई। आढ़ती ने सुपरवाइजर पर धान सीजन के दौरान बड़ी रकम लेने तक के आरोप लगा दिए। जिस पर मंडी सुपरवाइजर आरोपों को नकारते नजर आए। स्थानीय किसानों के नाम पर कट रहे गेटपास
मंडी में चल रहे इस खेल का तरीका भी बेहद संगठित बताया जा रहा है। सूत्रों की माने ताे यूपी से आने वाले गेहूं को मंडी में एंट्री दिलाने के लिए स्थानीय किसानों के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। पोर्टल पर गेटपास भी स्थानीय किसानों के नाम से काटे जा रहे हैं, जबकि असल में गेहूं बाहर से लाया जा रहा है। इससे सरकारी खरीद प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। दो ट्रालियां पकड़ी, मौके पर हुआ हंगामा
मामला तब सामने आया जब मार्केट कमेटी के कर्मचारियों ने अचानक कार्रवाई करते हुए दो ट्रालियों और एक पिकअप को रोक लिया। जांच के दौरान ट्रालियों के साथ आए लोग उत्तर प्रदेश के निवासी पाए गए। इसके बाद मौके पर ही विवाद शुरू हो गया और आढ़तियों व कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हुई। ड्राइवर ने कबूला-कैराना से लाया गेहूं
यूपी नंबर की पिकअप के चालक राजीव ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के कैराना से गेहूं लेकर घरौंडा मंडी में आया है। उसने बताया कि करीब 30 क्विंटल गेहूं लेकर आया है और एक आढ़ती के कहने पर यहां पहुंचा है। जब उससे पूछा गया कि किस फर्म पर माल उतारना है तो उसने कहा कि आढ़ती को बुलाने गया हुआ है। फर्म मालिक ने बताया स्थानीय फसल, लोगों ने उठाए सवाल
जिस फर्म के नाम पर गेहूं लाया गया था, उसके मालिक ने इसे स्थानीय किसान की फसल बताने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए। लोगों का कहना था कि जब चालक खुद यूपी से आने की बात कह रहा है तो इसे स्थानीय फसल कैसे बताया जा सकता है। आढ़ती प्रवीण कुमार ने लगाए गंभीर आरोप
आढ़ती प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि मंडी में रोजाना दर्जनों ट्रालियां यूपी से आ रही हैं। उन्होंने कहा कि मार्केट कमेटी के कर्मचारी पैसे लेकर इन ट्रालियों की एंट्री करवा रहे हैं। प्रवीण ने आरोप लगाया कि कर्मचारी नरेश व अन्य के सामने से ही कई ट्रालियां मंडी में दाखिल हो रही हैं और इसके लिए पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरा खेल कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा है। नरेश पर सीधे आरोप, बहस हुई तेज
प्रवीण कुमार ने साफ तौर पर कहा कि यह काम नरेश द्वारा करवाया जा रहा है और एंट्री के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। इस पर मंडी सुपरवाइजर नरेश कुमार ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि एक भी ऐसी फर्म दिखा दी जाए जहां उन्होंने यूपी की ट्राली उतरवाई हो। उन्होंने कहा कि कोई भी आढ़ती सामने आकर उनका नाम ले दे। धान सीजन में पैसों के लेन-देन के भी आरोप
विवाद के दौरान प्रवीण कुमार ने नरेश पर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि धान के सीजन में 10 से 20 लाख रुपए तक का खेल चलता है और पैसे लेकर बिना गेटपास के माल निकलवाया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने खुद नरेश को पैसे दिए हैं और बिना गेटपास के धान निकलवाया गया था। सुपरवाइजर ने कहा-आरोप बेबुनियाद, सबूत दो
नरेश कुमार ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उन्होंने पूरे सीजन में किसी गेट पर ड्यूटी नहीं की। उन्होंने कहा कि अगर पैसे लिए गए थे तो पहले शिकायत क्यों नहीं की गई। उन्होंने प्रवीण से कहा कि अगर कोई सबूत है तो सामने लाएं। इस पर प्रवीण ने दावा किया कि उनके पास सभी सबूत मौजूद हैं और वह उन्हें पेश करेंगे। दो ड्राइवर फरार, एक का कटा प्राइवेट गेटपास
मंडी सुपरवाइजर नरेश कुमार ने बताया कि पकड़ी गई ट्रालियों में से दो ड्राइवर मौके से फरार हो गए, जबकि एक ट्राली का प्राइवेट गेटपास काटा गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। मंडी प्रधान और सचिव ने साधी चुप्पी
जब इस मामले को लेकर मंडी प्रधान जयभगवान गोयल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वहीं मार्केट कमेटी के सचिव सरीन कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले फोन नहीं उठाया। बाद में कॉल आने पर जैसे ही उनसे यूपी के गेहूं के बारे में सवाल पूछा गया, उन्होंने फोन काट दिया और फिर कॉल रिसीव नहीं किया। किसानों में नाराजगी, हक छिनने का डर
इस पूरे मामले से स्थानीय किसानों में भारी नाराजगी है। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान अजय राणा ने कहा कि बाहर से लाई गई गेहूं उनके हक पर डाका डाल रही है। उन्होंने कहा कि अगर यही हाल रहा तो असली किसानों को अपनी फसल बेचने में भारी परेशानी होगी। प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप
अजय राणा ने आरोप लगाया कि यह सब प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भी ट्रालियां पकड़ी गई थीं, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भले ही घोटाले रोकने की बात करते हों, लेकिन अफसरशाही हावी है और जमीन पर हालात अलग हैं। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। प्रणाली पर उठे सवाल, पारदर्शिता की जरूरत
इस मामले ने सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर बाहरी राज्यों का गेहूं स्थानीय किसानों के नाम पर बिक रहा है तो इससे न सिर्फ असली किसानों को नुकसान होगा, बल्कि सरकार की नीतियों पर भी असर पड़ेगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों के खिलाफ कब तक कार्रवाई होती है।



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