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इंश्योरेंस कंपनी को झटका, क्लेम राशि लौटाने का आदेश:मोहाली उपभोक्ता आयोग का फैसला, 3.72 लाख के साथ मुआवजा भी देना होगा




मोहाली स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में इंश्योरेंस कंपनी को बड़ा झटका देते हुए मरीज के इलाज का क्लेम लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूत के बीमारी छिपाने का आरोप लगाकर क्लेम खारिज करना सेवा में कमी (deficiency in service) माना जाएगा। शिकायतकर्ता संदीप सिंह ने अपने पिता के इलाज पर खर्च हुए 3.72 लाख रुपये के क्लेम को लेकर आयोग का दरवाजा खटखटाया था। इंश्योरेंस कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया था कि मरीज को पहले से हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) था, जिसकी जानकारी पॉलिसी लेते समय नहीं दी गई। हालांकि, सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी इस आरोप को साबित करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर पाई। केवल अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज एक टिप्पणी के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं माना गया। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी को यह साबित करना होता है कि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई थी। इस मामले में आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 3,72,257 रुपये की पूरी क्लेम राशि दो महीने के भीतर अदा करे, अन्यथा इस पर 6% सालाना ब्याज भी देना होगा। साथ ही मानसिक उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च के लिए 25 हजार रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश भी दिए गए हैं। तीन पाइंट में जाने पूरा मामला 1. संदीप सिंह ने 30 मई 2020 को अपने और अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी। इस पॉलिसी के लिए उन्होंने 67,073 रुपये प्रीमियम चुकाया और समय-समय पर इसका नवीनीकरण भी करवाते रहे, जिससे पॉलिसी लगातार प्रभावी रही। 2. 27 नवंबर 2021 को उनके पिता नरेंद्र सिंह को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें तुरंत पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के एडवांस्ड कार्डियक सेंटर में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों ने कोरोनरी आर्टरी डिजीज का पता लगाया और तुरंत स्टेंट डालने (पीसीआई प्रक्रिया) की सलाह दी। उसी दिन उनका ऑपरेशन किया गया और अगले दिन छुट्टी दे दी गई। 3. इस पूरे इलाज पर कुल 3,72,257 रुपये का खर्च आया। संदीप सिंह ने सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ 12 फरवरी 2022 को इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम दाखिल किया, लेकिन कंपनी ने 28 फरवरी 2022 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि मरीज को पहले से हाइपरटेंशन था, जिसकी जानकारी पॉलिसी लेते समय नहीं दी गई थी। यह दलील दी गई शिकायतकर्ता कहा कि पिता को पहले से हाइपरटेंशन नहीं था, पॉलिसी लेते समय सभी जानकारी सही दी गई थी। इस पर इंश्योरेंस कंपनी नें कहा कि मरीज 12 साल से हाइपरटेंशन का मरीज था, यह तथ्य छिपाया गया। अस्पताल रिकॉर्ड की एक लाइन के आधार पर आरोप गलत है, जानबूझकर कोई जानकारी नहीं छिपाई गई। आयोग ने दोनों की दलील सुनने के बाद कहा कि कंपनी ठोस और पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रही है। क्लेम खारिज करना गलत माना गया, इसे सेवा में कमी करार दिया गया। कंपनी को 3.72 लाख रुपये दो महीने के भीतर अदा तय समय में भुगतान न करने पर 6% सालाना ब्याज भी देना होगा।



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