आसाराम केस के मुख्य गवाह महेंद्र चावला, इसके भाई देवेंद्र चावला और भतीजे राम का आज तीन दिन का पुलिस रिमांड पूरा हो रहा है। इन पर आरोप है कि इन्होंने गवाही पलटने के नाम पर 70 लाख रुपए हड़पे हैं। आज गुरुवार को तीनों को फिर अदालत के सामने पेश किया जाएगा। तीन दिन की रिमांड पर लेकर पुलिस ने तीनों से आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की। साथ ही कुछ नकदी भी बरामद की है। हालांकि इसका खुलासा नहीं किया गया है। उधर, देवेंद्र को डाक विभाग के डाकपाल पद से निलंबित कर दिया गया है। शनिवार को पुलिस टीम ने आसाराम प्रकरण के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला, उनके भाई डाक विभाग में डाकपाल के पर तैनात देवेंद्र चावला व भतीजे राम को गिरफ्तार किया था। तीनों पर आरोप है कि सनौली गांव के पूर्व सरपंच सुरेंद्र शर्मा के साथ चल रहे मुकदमों में पक्ष में गवाही देने और समझौते के नाम पर 70 लाख रुपए लिए। बाद में 80 लाख रुपए की मांग करते हुए ब्लैकमेल किया और गवाही से बदल गए। पुलिस ने सोमवार को तीनों को तीन दिन के रिमांड पर लिया था। रिमांड के दौरान आरोपियों के कब्जे से 70 लाख रुपए की नकदी बरामद करने के प्रयास किए गए। इस दौरान टीमों ने अलग-अलग ठिकानों पर दबिश भी दी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपियों के कब्जे से कुछ नकदी बरामद भी की गई है। जानिए महेंद्र ने कैसे ठगे ₹70 लाख 3 पॉइंट में पढ़िए…क्यों मुकरा महेंद्र चावला 80 लाख की अतिरिक्त मांग: गिरफ्तारी वारंट के बाद 16 मार्च की रात महेंद्र मीडिएटर के घर पहुंचा। वहां उसने कहा कि सरपंच संजय त्यागी से पंचायत में एक प्रस्ताव पेश करवाया जाए, जिसमें दुकान गिराने का ऑर्डर दिया जाए। हालांकि यह सामने नहीं आया कि महेंद्र ये दुकानें क्यों गिरवाना चाहता था। अगले दिन प्रस्ताव पेश हुआ: भगत सिंह ने बताया कि अगले ही दिन पंचायत से ये प्रस्ताव पास हो गया, लेकिन इसके बाद महेंद्र ने 18 मार्च को 80 लाख रुपए और देने की डिमांड की। धमकी दी कि अगर ये पैसे नहीं मिले तो कोर्ट में वह झूठी गवाही देगा। उसने कहा कि सरपंच करोड़पति है, 80 लाख रुपए देना उसके लिए बड़ी बात नहीं है। कोर्ट में फिर बदली गवाही: भगत सिंह ने आगे बताया कि हमने महेंद्र 80 लाख रुपए देने से मना कर दिया। इसके बाद उसने 19 मार्च को कोर्ट में अपनी पुरानी गवाही बदलकर सबके खिलाफ बयान दे दिया।
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