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अमेरिका में बिका MLA हॉस्टल का फर्नीचर केस:विधानसभा विशेष कमेटी की जांच शुरू, चंडीगढ़ से मांगा रिकॉर्ड, 2002 तक यूटी के पास थी देखरेख




चंडीगढ़ में विधानसभा (पंजाब और हरियाणा विधानसभा), एमएलए हॉस्टल और अन्य सरकारी संस्थानों से हेरिटेज फर्नीचर अमेरिका में बिक्री होने का मामला और गहरा गया है। इस मामले में अब पंजाब विधानसभा ने जांच शुरू कर दी है। इसके लिए जहां हाउस कमेटी को अधिकार दिए गए हैं। विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन से पूछा है कि नीलाम हुआ फर्नीचर किसकी कस्टडी में था। चंडीगढ़ प्रशासन से जल्द रिपोर्ट मांगी गई है। क्योंकि 2002 तक हास्टल की देखरेख यूटी के पास था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने साल 2011 में ही चंडीगढ़ के इन हेरिटेज सामानों के निर्यात, बिक्री और मूवमेंट पर सख्त प्रतिबंध लगाया था। विधानसभा स्पीकर ने इस बारे में क्या बताया, तीन प्वाइंटों में जानें 1. कमेटी को दिए जांच के अधिकार : विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने बताया कि हाउस की कमेटी को अधिकार दिया गया है कि इसकी जांच की जाए। 2. 2002 में पंजाब को मिले राइट : एक हाई लेवल मीटिंग में मैंने खुद चंडीगढ़ प्रशासन से पूछा है कि पिछले दिनों जो फर्नीचर अमेरिका में नीलाम हुआ है, वह किसकी कस्टडी में था। क्योंकि 2002 तक एमएलए हॉस्टल व एमएलए फ्लैट के सारे इंतजाम यूटी प्रशासन देखता रहा है। 2002 के बाद यह जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी पंजाब को मिली थी। वहां पर अब कोई भी विरासती फर्नीचर नहीं है। 3. फर्नीचर बाहर जाने की गुजाइंश नहीं : हालांकि विरासती फर्नीचर चंडीगढ़ के अलग-अलग सरकारी दफ्तरों, यहां तक कि थानों में भी पड़ा है। उसकी इन्वेंटरी बनाई गई है। ऐसे में अब फर्नीचर बाहर जाने की गुंजाइश नहीं है। यह 2002 से पहले ही बाहर गया है। इसलिए पत्र लिखा गया है। कानून मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। 59 लाख से अधिक में बिका फर्नीचर जून 2026 में, अमेरिका के शिकागो में स्थित एक नीलामी घर में पंजाब एमएलए हॉस्टल से जुड़े हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी की गई। नीलामी में हेरिटेज कुर्सियों का एक जोड़ा और चार लो-स्टूल (कम ऊंचाई वाले स्टूल) बेचे गए। फर्नीचर की कीमत करीब 72,720 अमेरिकी डॉलर (यानी 59 लाख रुपये से अधिक) थी। नीलाम कुर्सियों पर बकायदा इन्वेंट्री मार्किंग “MLA (H) PB/1/B-11” लिखी हुई थी। इससे पहले सितंबर 2025 में फ्रांस के पेरिस में एक ऑक्शन हाउस द्वारा पियरे जेनरेट द्वारा डिजाइन किए गए चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की 16 वस्तुओं की नीलामी की गई थी। यह पूरा फर्नीचर करीब 3 करोड़ 93 लाख रुपये में बिका था। पुलिस की कहानी पड़ी, आरोपी हुए बरी
हेरिटेज फर्नीचर विदेशों में बिकने के मामले काफी समय से आते रहे हैं। साल 2022 में चंडीगढ़ जिला अदालत में हेरिटेज फर्नीचर चोरी से जुड़ा मामला चल रहा था, लेकिन पुलिस की कमजोर पैरवी और सबूतों की कमी के कारण 6 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। पुलिस कोर्ट में चोरी की कड़ियों और रिकवरी को पूरी तरह साबित करने में विफल रही थी। हालांकि जांच के दौरान कई बार आरोपियों के तार मुंबई के कबाड़ तस्करों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़े पाए गए, जो चंडीगढ़ के सुरक्षाकर्मियों या कर्मचारियों की मिलीभगत से सामान चुराकर विदेशों में शिप कर देते थे। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने साल 2011 में ही चंडीगढ़ के इन हेरिटेज सामानों के निर्यात, बिक्री और मूवमेंट पर सख्त प्रतिबंध लगाया था, इसके बावजूद चोरी का सिलसिला पूरी तरह नहीं थम सका है।



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