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अमृतसर में मीरी-पीरी खालसा मार्च 24 जुलाई से निकलेगा:जत्थेदार और एसजीपीसी अध्यक्ष ने संगत से शामिल होने की अपील की




श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मीरी-पीरी दिवस के शुभ अवसर पर 24 जुलाई को एक विशाल ‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ निकालने की घोषणा की है। यह ऐतिहासिक मार्च श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू होकर तख्त श्री दमदमा साहिब तक जाएगा। पंथिक नेताओं ने सिख संगत, विशेष रूप से नौजवानों से अपील की है कि वे खालसाई दस्तारें सजाकर बड़ी संख्या में इस मार्च का हिस्सा बनें। भक्ति और शक्ति का प्रतीक है ‘मीरी-पीरी’ सिद्धांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने मीरी-पीरी सिद्धांत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने श्री अकाल तख्त साहिब की स्थापना कर सिख कौम को यह महान सिद्धांत दिया था। गुरु साहिब द्वारा धारण की गई मीरी और पीरी की दो तलवारें धर्म और राजसत्ता, भक्ति और शक्ति के संतुलन का प्रतीक हैं। यह सिद्धांत सिखों को आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को निभाने की प्रेरणा देता है।” मार्च का मार्ग और कार्यक्रम प्रस्थान: 24 जुलाई, सुबह 10:00 बजे (श्री अकाल तख्त साहिब, अमृतसर से) मार्ग: अमृतसर, तरनतारन और मालवा क्षेत्र के विभिन्न गांवों व शहरों से चरणबद्ध तरीके से गुजरेगा। धार्मिक कार्यक्रम: मार्ग के प्रत्येक पड़ाव पर दिन और रात में धार्मिक दीवान सजाए जाएंगे, जिनमें गुरबाणी कीर्तन, कथा-विचार और संगत के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे। समापन: तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) में। एकता और ‘चढ़दी कला’ का संदेश एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मार्च के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य सिख इतिहास, समृद्ध परंपरा और गुरु साहिबान द्वारा दिए गए मीरी-पीरी के सिद्धांत को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह मार्च सिख कौम की एकता, अनुशासन और ‘चढ़दी कला’ का प्रतीक बनेगा।



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