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अक्षय तृतीया पर चुलकाना धाम में भीड़:बाबा श्याम के दर्शनों के लिए लगी लंबी कतारें, भीषण गर्मी के बावजूद पहुंचे श्रद्धालु




अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर चुलकाना धाम स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चुलकाना धाम को अब विश्व स्तर पर शक्तिपीठों में से एक के रूप में पहचान मिल चुकी है। यहां दिन-प्रतिदिन भक्तों की संख्या और आस्था बढ़ती जा रही है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। वृद्धावस्था में भी उन्होंने उपवास और दान-पुण्य का पालन किया अक्षय तृतीया से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मदास नामक एक वैश्य ने अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान कर देवी-देवताओं की पूजा की थी। उन्होंने ब्राह्मणों को स्वर्ण, वस्त्र और अन्य वस्तुएं दान की। रोगग्रस्त और वृद्धावस्था में भी उन्होंने उपवास और दान-पुण्य का पालन किया। इस दान-पुण्य के फलस्वरूप, अगले जन्म में वे कुशावती के एक धनी राजा बने। ऐसी मान्यता है कि यही राजा बाद में चंद्रगुप्त के रूप में जन्मा। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था। दक्षिण भारत में परशुराम जयंती इस दिन बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर परशुराम की पूजा और अर्घ्य का विशेष महत्व है। इस दिन गौरी-पूजा करती हैं स्त्रियां सौभाग्यवती स्त्रियां इस दिन गौरी-पूजा करती हैं और मिठाई, फल और चने बांटती हैं। वे कलश में जल, फल आदि का दान भी करती हैं। चुलकाना धाम स्थित प्राचीन श्री श्याम बाबा मंदिर महाभारत काल से जुड़ी शीशदान भूमि पर स्थापित है। यह स्थान भक्तों की अपार आस्था का प्रमुख केंद्र है। अक्षय तृतीया पर किए गए दान को ‘अक्षय’ माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह कभी नष्ट नहीं होता। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान का फल युगों-युगों तक प्राप्त होता रहता है। इस पावन अवसर पर पूजन और दान करने से धन, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है।



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