कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही में कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने मीरी-पीरी संस्थान शाहाबाद में सैलरी को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के लिए शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को जिम्मेदार ठहराया है। झींडा ने साफ कहा कि HSGMC ने संस
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आज देर शाम कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही में पहुंचे झींडा ने कहा कि संस्थान के स्टाफ को 3 महीने की सैलरी नहीं मिली है। इससे स्टाफ का परेशान होना जायज है। इसलिए स्टाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा है। हालांकि उन्होंने डॉक्टरों से मरीज की देखभाल बंद नहीं करने की अपील की है।
गुरुद्वारे में बातचीत करते जगदीश सिंह झींडा।
SGPC ने फैसले को चुनौती दी
झींडा ने कहा कि 12 मई को हाईकोर्ट ने कमेटी के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन SGPC ने उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को होनी है। मामला कोर्ट में चला हुआ है। साथ ही संस्थान का पूरा कंट्रोल कमेटी के पास नहीं है। इसलिए संस्थान की वित्तीय जिम्मेदारी SGPC की बनती है।
SGPC के प्रधान से हुई बातचीत
झींडा ने कहा कि इस मामले को लेकर उनकी अस्पताल के डॉक्टर्स से बातचीत हुई है। उन्होंने डॉक्टर्स से मानवता के नाते अस्पताल आने वाले मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होने देने का आग्रह किया है। मामले को लेकर उनकी SGPC के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी से बातचीत हुई है। उनको सैलरी के लिए जल्द ही कोई समाधान निकलने की उम्मीद है।
गुरुद्वारा में पहुंचे जगदीश सिंह झींडा।
गुरुद्वारे से छेड़छाड़ का विरोध
झींडा ने पाकिस्तान के फर्रुखाबाद के ऐतिहासिक गुरुद्वारे के हिस्से को गिराए जाने की घटना का विरोध भी जताया। कहा कि यह गुरुद्वारा सिख समाज की आस्था और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
सरकार को भेजेंगे लेटर
झींडा ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब से छेड़छाड़ के मामले में कमेटी जल्द ही सरकार को पत्र लिखेगी। पत्र के जरिए पाकिस्तान के भू-माफिया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग करेंगे। साथ ही मांग करते हैं कि भविष्य में किसी भी धार्मिक धरोहर के साथ इस तरह की घटना दोबारा न हो।
