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SC छात्रों की 13.52 करोड़ फीस अटकी:स्कॉलरशिप खातों में पहुंची, लेकिन यूनिवर्सिटी तक नहीं आई रकम, 4 साल में फीस वसूली में बड़ी चूक




चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध कॉलेजों में अनुसूचित जाति (एससी) छात्रों की फीस वसूली को लेकर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच यूनिवर्सिटी 13 करोड़ 52 लाख 72 हजार 465 रुपए की फीस वसूलने में विफल रही। यह स्थिति तब बनी जब पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप की राशि छात्रों के बैंक खातों में पहुंच चुकी थी, लेकिन फीस का बड़ा हिस्सा यूनिवर्सिटी के खाते में जमा नहीं हो सका। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि सितंबर 2018 में पीयू ने निर्णय लिया था कि एससी वर्ग के पात्र छात्रों को स्कॉलरशिप मिलने तक फीस जमा कराने से छूट दी जाएगी। इसके लिए छात्रों से लिखित आश्वासन लिया गया था कि छात्रवृत्ति की राशि मिलने के बाद वे लंबित फीस जमा कर देंगे। हालांकि फीस वसूली की निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो सकी और करोड़ों रुपए की राशि बकाया रह गई। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019-20 में सबसे अधिक 4.65 करोड़ रुपए की फीस बकाया रही। इसके अलावा 2018-19 में 3.41 करोड़, 2020-21 में 2.96 करोड़ और 2021-22 में 2.49 करोड़ रुपए की फीस वसूल नहीं हो सकी। छात्रों का रिकॉर्ड भी नहीं ऑडिट जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पंजाब यूनिवर्सिटी के पास यह रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि स्कॉलरशिप मिलने के बाद कितने एससी छात्रों ने फीस जमा करवाई और कितनों ने नहीं। वहीं, संबद्ध कॉलेजों ने भी छात्रों से जुड़ी पूरी जानकारी यूनिवर्सिटी को उपलब्ध नहीं करवाई। ऑडिट टीम ने चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के एससी छात्रों की फीस वसूली से जुड़ी जानकारी मांगी थी, लेकिन यूनिवर्सिटी और संबंधित विभाग पूरी जानकारी नहीं दे सके। वहीं, ऑडिट रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों पर भी पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। वित्तीय अनुशासन पर उठे सवाल मामले को लेकर सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने कहा कि यह सिर्फ फीस वसूली का मामला नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन और संस्थागत जवाबदेही का भी विषय है। जब स्कॉलरशिप की राशि छात्रों के खातों में पहुंच चुकी थी तो यूनिवर्सिटी को समयबद्ध तरीके से फीस जमा करवाना सुनिश्चित करना चाहिए था। करोड़ों रुपए वर्षों तक बकाया रहना और उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध न होना निगरानी तंत्र की गंभीर खामी को दर्शाता है।



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