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rupnagar panchayat inter village marriage ban; Social Boycott


रूपनगर (रोपड़) में एक ही गांव के युवक और युवतियों के लव मैरिज करने पर पंचायत ने कड़ा रुख अपनाया है। उइंद गांव की पंचायत ने ऐसे विवाह करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने और उन्हें गांव से बाहर निकालने का फरमान जारी किया है।

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गांव के सरपंच के मुताबिक उनके गांव में पांच-छह केस ऐसे हो गए हैं। ऐसे में इसे देखते हुए ये फैसला लिया गया है। ये फरमान प्रदेश में कोई नया नहीं है। पहले भी कई पंचायतें ऐसे फरमान जारी कर चुकी हैं। 2025 से अब तक राज्य के 9 गांवों की पंचायतें बहिष्कार, गांव निकाला, साथ देने वालों का सोशल बायकॉट के प्रस्ताव पास कर चुकी हैं।

वहीं, दूसरी तरफ कानून के जानकार पंचायतों के इस फैसले को असंवैधानिक बता रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायतें किसी को शादी करने से नहीं रोक सकती। यही नहीं पंचायतों के पास किसी का सोशल बायकॉट करने का भी अधिकारी नहीं है।

एक ही गांव में शादी के विरोध में पंचायत में बैठे लोग। फाइल फोटो

अब पढ़िए पंचायत ने क्या कहा…

  • लगातार बढ़ रहे मामले: उइंद गांव के सरपंच मेजर सिंह का कहना है कि एक ही गांव में लड़के-लड़कियों के आपस में शादी करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उनके गांव में भी पांच-छह केस ऐसे हो गए हैं। जिसकी वजह से पंचायत ने अब नया प्रस्ताव पास किया है कि जो भी गांव में आपस में शादी करेंगे उन्हें गांव से निकाल दिया जाएगा। परिवार या अन्य किसी ने उनका साथ दिया तो उनका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
  • आपसी तकरार बढ़ती है: सरपंच का कहना है कि ऐसी शादियां माता-पिता की सहमति के बिना होती हैं। जब लड़का-लड़की शादी करते हैं तो गांव में दोनों परिवारों के बीच तकरार पैदा हो जाती है। जिससे गांव में आपसी सौहार्द खत्म हो जाता है।
  • रिश्ते खत्म हो जाएंगे: सरपंच का कहना है कि उन्हें पता है कि ऐसा करना कानून के खिलाफ है। लेकिन इससे आपसी रिश्ते भी खत्म हो जाते हैं। गांवों में सभी एक दूसरे से बेहद करीबी होते हैं। गांवों में कोई चाचा, कोई ताया और कोई भाई होता हे। उनके बच्चे आपस में शादियां कैसे कर सकते हैं? यह हमारे कल्चर के भी खिलाफ है।
  • हत्याएं तक हो जाती हैं: सरपंच का कहना है कि ऐसी सभी शादियां माता पिता की सहमति के बिना होती हैं। अगर वो गांव में ही रहने लगेंगे तो दोनों की जान को भी खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में हत्याएं तक हो जाती हैं। इसके अलावा दोनों के परिवार आपस में भी लड़ने शुरू हो जाते हैं।
  • किशोरों पर नेगेटिव इंपैक्ट: मेजर सिंह का कहना है कि गांव में अगर इस तरह लव मैरिज होने लगेंगी तो जो गांव में किशोर हैं उनके माइंड पर इसका नेगेटिव इंपेक्ट आएगा। उनकी देखा-देखी वो भी ऐसे ही करने लगेंगे। इसे रोकने के लिए पंचायत ने सर्व सम्मति से यह फैसला लिया है।

एडवोकेट बोले- पंचायतों को नहीं कोई अधिकार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट कमलदीप सिद्धू का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शादी के लिए सभी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता है। पंचायत किसी को शादी करने से नहीं रोक सकती। पंचायत न्यायिक संस्था नहीं है। बहिष्कार या निकालने का आदेश भी कानूनन गलत है।

इन गांवों अब तक प्रस्ताव पास हो चुका…

  • फरीदकोट का सिरसरी और अनोखपुरा गांव: जुलाई 2025 में दोनों पंचायतों ने संयुक्त रूप से एक ही गांव में शादी पर पूर्ण बहिष्कार का प्रस्ताव पास किया। साथ ही राज्य सरकार से कानून बनाने की मांग की गई।
  • मोहाली का मानकपुर शरीफ गांव: 31 जुलाई 2025 को पंचायत ने प्रस्ताव पास किया कि परिवार की मंजूरी के बिना अगर कोई कोर्ट मैरिज करता है तो दंपति को गांव या आसपास के गांवों में रहने नहीं दिया जाएगा। मदद करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
  • मोगा का घल कलां गांव: मोगा के घल कलां गांव में पहले से पंचायत का फरमान था कि कोई एक ही गांव में शादी नहीं करेगा। जुलाई 2025 में एक ही गांव में शादी करने वाले दंपति और परिवार का बहिष्कार किया गया। बाद में महिला पर हमला भी हुआ।
  • बठिंडा का कोटशमीर गांव : जुलाई 2025 में पंचायत ने फैसला लिया कि एक ही गांव में लव मैरिज करने वाले दंपति को गांव में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो लोग इनका साथ देंगे उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
  • पटियाला का गलवट्टी गांव: 2016 में गांव के लड़के व लड़की ने भागकर शादी की। दोनों कई साल तक घर नहीं आए। अगस्त 2025 में वो गांव लौटे तो लाेगों ने उनका बहिष्कार किया। पंचायत ने प्रस्ताव पास कर उन्हें गांव छोड़ने को कहा।
  • अमृतसर का धारीवाल कलेर: अजनाला के नजदीक धालीवाल कलेर गांव की पंचायत ने फरवरी 2026 में एक ही गांव में शादी पर सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया। पंचायत ने कहा कि जो भी ऐसा कृत्य करेंगे उनको गांव में एंट्री नहीं करने दी जाएगी।
  • संगरूर का रोगलां गांव: फरवरी 2026 में संगरूर के रोगलां गांव में एक युवक व युवती ने आपस में शादी की। शादी के बाद दो महीने लड़का-लड़की गांव में ही रहे। पंचायत ने उन्हें गांव से बाहर जाने को कहा। जब वो गांव छोड़कर नहीं गए तो पंचायत ने उनका बायकॉट करने का फैसला कर दिया।
  • अमृतसर का अदलीवाल गांव: अदलीवाल में इसी साल अप्रैल के पहले सप्ताह में पंचायत ने एक ही गांव में शादी करने वाले दंपति और परिवार का बहिष्कार करने का प्रस्ताव पास किया। इसका खूब विरोध भी हुआ।
  • रोपड़ का उइंद गांव: 19 अप्रैल को रोपड़ जिले के उइंद गांव की पंचायत ने प्रस्ताव पास किया कि अगर किसी ने एक ही गांव में शादी की तो उसकाे गांव से निकाल दिया जाएगा। उसके परिवार ने अगर उनका साथ दिया तो परिवार का भी सामजिक बहिष्कार किया जाएगा।

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