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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मानसा कोर्ट में पूर्व विधायक नाजर सिंह मानशाहिया द्वारा दायर मानहानि मामले में पेश नहीं हुए। मुख्यमंत्री के वकील ने विशेष विधानसभा सत्र का हवाला देते हुए पेशी से छूट की अर्जी दी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई 2026 की तारीख तय की है। मुख्यमंत्री को 1 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया था, जिसमें पेश न होने पर उनकी जमानत रद्द करने की बात भी कही गई थी।
मानशाहिया पर लगाया था ये आरोप
यह मानहानि मामला 2019 से जुड़ा है। 2017 में मानसा से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक चुने गए नाजर सिंह मानशाहिया 2019 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद तत्कालीन सांसद और आप के पंजाब अध्यक्ष भगवंत मान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मानशाहिया पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 10 करोड़ रुपए और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की अध्यक्षता के लिए कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए हैं।
मान से आरोपों पर स्पष्टीकरण और सबूत मांगे
इन आरोपों के बाद नाजर सिंह मानशाहिया को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। उन्होंने भगवंत मान से आरोपों पर स्पष्टीकरण और सबूत मांगे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मानशाहिया ने मानसा की अदालत में भगवंत मान के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। 2022 में मुख्यमंत्री बनने के बाद भगवंत मान मानसा अदालत में पेश हुए थे, जहां उन्हें जमानत मिली थी। वह तब से जमानत पर हैं।







