आरोपी को पुलिस उसके घर से जबरदस्ती उठा ले गई। यह वीडियो आरोपी के घरवालों ने बनाई है।
लुधियाना के थाना डिवीजन-7 पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। बचाव पक्ष के एक वकील ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके मुवक्किल को नशा तस्करी (NDPS) के एक मनगढ़ंत मामले में फंसाया गया है।
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वकील ने दावा किया है कि पुलिस ने CCTV फुटेज और समय में भारी हेराफेरी की है। पुलिस दावा कर रही है कि युवक को नशीली गोलियों के साथ टी-पॉइंट से पकड़ा है। जबकि, हकीकत यह है कि पुलिस युवक को उसके घर से उठाकर ले गई है। उसके पास कोई गोलियां नहीं थीं।
वकील का कहना है कि यह पूरा मुकदमा झूठा है। राज्य में चलाए जा रहे नशा विरोधी अभियान का फायदा उठाकर पुलिस असली तस्करों को पकड़ने के बजाय राजनीतिक रंजिश निकालने या अपना टारगेट पूरा करने के लिए बेगुनाहों को फंसा रही है।
इतना ही नहीं, इस मामले में जब आरोपी को अदालत में पेश किया गया, तो उसकी शारीरिक हालत इतनी खराब थी कि मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिमांड देने के बजाय आरोपी का दोबारा मेडिकल करवाने के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया। पुलिस ने उसे इलेक्ट्रिक शॉट देकर टॉर्चर किया है।

आरोपी को उसके घर से खींचकर निकालती दिखी पुलिस।
पुलिस की FIR में क्या लिखा है…
- ASI को शिकायतकर्ता बनाया: थाना डिवीजन नंबर 7 की पुलिस ने FIR (No. 0151) दर्ज की है। इसके शिकायतकर्ता थाना डिवीजन 7 में तैनात ASI मलकीत सिंह को बताया गया है। इस FIR में दावा किया गया है कि पुलिस को 10 जून 2026 को रात 9:50 बजे सूचना मिली थी।
- मुखबिर ने दी थी सूचना: FIR के अनुसार, पुलिस पार्टी ताजपुर रोड टी-पॉइंट के पास गश्त पर थी। तभी एक खास मुखबिर ने आकर बताया कि एक युवक काले रंग के कपड़े पहने हुए है और भारी मात्रा में नशीली गोलियां सप्लाई करने जा रहा है।
- गोलियां बरामद करने का दावा: पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने बिहारी कॉलोनी के पास नाकाबंदी की और शक के आधार पर युवक को रोका। तलाशी लेने पर उसकी निक्कर की दाहिनी जेब से एक मोमी लिफाफा मिला, जिसमें 1020 संतरे रंग की नशीली गोलियां बरामद हुईं।
- NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया: इसके बाद पुलिस ने युवक के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 22-61-85 के तहत मामला दर्ज कर लिया। युवक की पहचान रवि कुमार उर्फ रवि के रूप में हुई। वह लुधियाना में ताजपुर रोड पर राम नगर बिहारी कॉलोनी का रहने वाला है।

पुलिस ने FIR में गिरफ्तारी की यह कहानी लिखी है।
आरोपी के वकील ने पुलिस पर ये आरोप लगाए
- पुलिस ने घर से युवक को गिरफ्तार किया: आरोपी रवि कुमार के वकील एडवोकेट गगन बेदी ने इस FIR को सिरे से खारिज करते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एडवोकेट बेदी ने बताया कि FIR में पुलिस कह रही है कि उन्हें सूचना रात 9:50 बजे मिली। जबकि असलियत यह है कि पुलिस के 8 से 9 मुलाजिम रवि को रात 8 से साढ़े 8 बजे के बीच उसके घर से ही उठाकर ले गए थे।
- गिरफ्तारी का समय झूठा बताया: वकील का तर्क है कि जब व्यक्ति पहले से ही पुलिस हिरासत में था, तो रात 9:50 बजे सूचना मिलने और नाके पर गिरफ्तारी की कहानी पूरी तरह से झूठी है। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज को सबूत के रूप में पेश करने का दावा किया है।

जानकारी देते हुए आरोपी रवि कुमार के वकील एडवोकेट गगन बेदी।
- हिरासत में बेरहमी से टॉर्चर: वकील के अनुसार, जब पुलिस रवि को घर से ले गई, तब वह शारीरिक रूप से एकदम फिट था और उसके शरीर पर खरोंच तक नहीं थी, लेकिन 24 घंटे के अंदर जब उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, तो उसकी हालत बेहद दयनीय थी। आरोपी ने अदालत में बयान दिया कि उसे बुरी तरह पीटा गया और बिजली के झटके दिए गए।
- मेडिकल रिपोर्ट में मिलीभगत का आरोप: वकील ने कहा- अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, पुलिस ने पहले डॉ. अवतार और डॉ. जतिन से आरोपी का मेडिकल करवाया था। जबकि, पुलिस अधिकारियों ने इन डॉक्टरों के साथ मिलीभगत कर मेडिकल रिपोर्ट बदलवा दी है, ताकि उनके टॉर्चर की बात छुप सके।
- जज भी हैरान रह गए: पुलिस ने आरोपी की 3 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन मजिस्ट्रेट आरोपी की हालत देखकर खुद हैरान रह गए। जज ईशा गोयल (JMIC, लुधियाना) ने बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पुराने मेडिकल को खारिज करते हुए 13 जून 2026 को आदेश दिया कि सिविल सर्जन लुधियाना एक नया डॉक्टरों का बोर्ड बनाएं और 14 जून को आरोपी की निष्पक्ष मेडिकल जांच की जाए।
- वकील और परिवार की मांग: एडवोकेट गगन बेदी ने परिवार की तरफ से मांग की है कि 1020 गोलियों का यह झूठा पर्चा तुरंत रद्द किया जाए। साथ ही, जिन पुलिसकर्मियों ने इस झूठे मामले को बनाया है और युवक को हिरासत में प्रताड़ित किया है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।







