पंजाब कांग्रेस में प्रदेश प्रधान को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के घर 3 जुलाई को हुई नेताओं की बैठक की इनसाइड स्टोरी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक की शुरुआत ही इस बात से हुई कि अंदर होने वाली कोई भी चर्चा बाहर लीक नहीं हो
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नेताओं ने इसके लिए बाकायदा कसम खाई और तय किया कि मीडिया के सामने सभी एक ही लाइन बोलेंगे कि चन्नी को सभी अधिकार दिए गए हैं और वही पार्टी हाईकमान के सामने नेताओं की नाराजगी रखेंगे। मीटिंग खत्म होने के बाद तृप्त रजिंदर बाजवा और आशु ने मीडिया के सामने बिल्कुल यही लाइन दोहराई थी।
नेताओं ने कहा- उन्हें राजा वड़िंग की प्रधानगी मंजूर नहीं है। बैठक में जब वड़िंग को नेता मानने के पक्ष में हाथ उठाने को कहा गया तो किसी भी नेता ने समर्थन नहीं किया, जबकि चन्नी के नाम पर सभी ने हाथ खड़े कर दिए। इसके साथ ही विजयइंदर सिंगला के नाम पर भी किसी ने आपत्ति नहीं जताई।
बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी ने सभी नेताओं से कहा कि वो हाईकमान के पास इस मुद्दे को उठाएंगे तो क्या आखिर तक वो उनका साथ देंगे? बैठक में शामिल एक नेता नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि सभी नेताओं ने एकजुट होकर कह दिया कि जो फैसला चन्नी लेंगे वो उनके साथ खड़े रहेंगे। अंत में फैसला हुआ कि चन्नी ही हाईकमान से मिलकर नेताओं की नाराजगी, राजा वड़िंग को लेकर उठे ऐतराज और संगठनात्मक फैसले पर पुनर्विचार की मांग रखेंगे।
उधर, पहले चन्नी, फिर विजय इंद्र सिंगला का नाम अध्यक्ष के लिए फाइनल करने के बाद आखिर में राजा वडिंग को क्यों कंटीन्यू किया गया, इस पर पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाईकमान को कुछ सीनियर नेताओं ने सलाह दी कि राजा वडिंग को अध्यक्ष पद से हटाया तो जिला व ब्लॉक लेवल पर भी गुटबाजी बढ़ जाएगी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…

पूर्व सीएम चन्नी के घर हुई बैठक की इनसाइड स्टोरी..
- बात बाहर न जाए, सबने खाई कसम: चन्नी गुट के नेताओं ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि चरणजीत सिंह चन्नी के घर हुई मीटिंग की बातें बाहर लीक न हों इस पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सबसे पहले यही बात हुई कि कोई भी नेता मीटिंग में तय की गई रणनीति और अन्य बातों को बाहर लीक नहीं करेगा। इसके लिए नेताओं ने बाकायदा कसम भी खाई। मीटिंग की बातें पूरी तरह गोपनीय रहें, इसलिए अंदर सिर्फ बड़े और चुनिंदा नेताओं को ही एंट्री मिली। यह तय हुआ कि मीडिया के सामने सिर्फ एक ही लाइन बोलनी है कि “चन्नी साहब को सारे अधिकार दे दिए गए हैं और वो हमारी नाराजगी हाईकमान तक पहुंचाएंगे। हाईकमान इस फैसले को रिकंसीडर करे। मीटिंग खत्म होने के बाद तृप्त रजिंदर बाजवा और आशु ने मीडिया के सामने बिल्कुल यही लाइन दोहराई।
- लड़ाई बड़ी है, इसके लिए कितने लोग तैयार: मीटिंग का संचालन तृप्त रजिंदर बाजवा कर रहे थे। बैठक की बातों को गोपनीय रखने का वादा करने के बाद सबसे पहले नेताओं से पूछा गया कि लड़ाई बड़ी है, कितने लोग इसके लिए तैयार हैं। सभी नेताओं ने एक सुर में हाथ उठाया और कहा कि हम सभी हर परिस्थिति में साथ रहेंगे। बैठक में जो फैसला होगा उसे सभी नेता मानेंगे।
- चन्नी ही हों पंजाब कांग्रेस का चेहरा: मीटिंग में शामिल माझा के एक पूर्व विधायक ने बताया कि अंदर मौजूद हर छोटे-बड़े नेता की एक ही राय थी। सबने एक सुर में कहा कि पंजाब में अगर जीत हासिल करनी है, तो चरणजीत सिंह चन्नी को ही पंजाब कांग्रेस का मुख्य चेहरा हों।
- राजा वड़िंग के नाम पर किसी ने हाथ नहीं उठाया: बैठक में तृप्त रजिंदर बाजवा ने पूछा कि कौन कौन लोग राजा वड़िंग को अपना नेता मानते हैं, हाथ खड़े करें। लेकिन मीटिंग में एक भी नेता ने हाथ नहीं उठाया। लेकिन जैसे ही चन्नी की लीडरशिप को लेकर पूछा गया, तो सबने तुरंत हाथ खड़े कर दिए। नेताओं ने साफ कह दिया कि उन्हें वड़िंग की लीडरशिप बिल्कुल मंजूर नहीं है।
- बाजवा और रंधावा गुट भी वड़िंग के खिलाफ: बैठक में कुछ नेता ऐसे भी थे, जिना उठना बैठना बाजवा व रंधावा गुट के नेताओं के साथ भी है। बैठक में उनमें से एक पूर्व विधायक ने यहां तक कह दिया कि एलओपी प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा गुट के नेता भी राजा वड़िंग को पसंद नहीं करते। नेताओं का मानना है कि वड़िंग के काम करने का तरीका कमजोर है और वो भाषण देते समय गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
- जब चन्नी सर्वे में नंबर-1 थे, तो वड़िंग को क्यों चुना: दिल्ली में जिन नेताओं को अजय माकन की कमेटी ने बुलाया था, उन्होंने कहा कि जब पार्टी के सर्वे में चरणजीत सिंह चन्नी टॉप पर थे। अजय मकान की कमेटी ने भी चन्नी को बागडोर देने की बात कही थी, तो हाईकमान ने चन्नी को छोड़कर राजा वडिंग को ही अध्यक्ष क्यों बनाए रखा? नेताओं ने चन्नी को कहा कि इस संबंध में हाईकमान से जरूर सवाल किया जाना चाहिए।
- कार्यकाल पूरा होने पर भी एक्सटेंशन: बैठक में एक पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है। राजा वडिंग को प्रधान बनें 5 साल हो गए। उसके बावजूद हाईकमान ने उन्हें एक्सटेंशन दे दी, जबकि हाईकमान को पता था कि वडिंग के कारण पार्टी में गुटबाजी है और पंजाब में लगातार इलेक्शन हार रहे हैं।
- सिंगला के नाम पर ऐतराज नहीं था: मीटिंग में नेताओं ने कहा कि अगर हाईकमान विजयइंदर सिंगला को अध्यक्ष बनाती, तो चन्नी गुट को कोई दिक्कत नहीं थी। नेताओं ने मीटिंग में कहा कि हाईकमान ने जब प्रधान बदलना ही नहीं था, तो उनसे राय क्यों ली गई? लोगों ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का चेहरा बनाने की बात रखी थी।
- हाईकमान के सामने सबका विरोध रख दें: हाईकमान के फैसले से नाराज नेता पूरी मीटिंग में उनकी नाराजगी हाईकमान के सामने रखने की बात कर रहे थे। जिस पर चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि उनकी भावनाओं की वो कद्र करते हैं। उन्होंने कहा कि जो विरोध आप लोग जता रहे हैं, इसे हाईकमान के सामने रखें। हाईकमान के सामने बताना होगा कि पंजाब में किन किन नेताओं को यह फैसला मंजूर है। इस पर सभी नेताओं ने साफ कर दिया कि हमारी तरफ से आप हाईकमान से बात करें और एक-एक नेता आपको यह लिखकर देने को तैयार है। नेताओं ने जब चन्नी को समर्थन देकर आश्वस्त किया तो आखिर में यह फैसला लिया गया कि वो हाईकमान से मिलेंगे और सभी का विरोध दर्ज करवाएंगे।
- हाईकमान ने फैसला नहीं बदला तो घर बैठ जाउंगा: मालवा के एक नेता व पूर्व मंत्री ने मीटिंग में साफ कह दिया कि हाईकमान ने अगर अपना फैसला नहीं बदला तो वो घर बैठना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि राजा वडिंग की प्रधानगी उन्हें मंजूर नहीं है। पूर्व मंत्री के कहते ही सभी नेता फिर एक सुर में कहने लगे कि उन्हें भी वड़िंग की प्रधानगी मंजूर नहीं है।
देर शाम खड़गे का चन्नी को फोन आया
पूर्व विधायक के मुताबिक, बात बढ़ते देख देर शाम को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने खुद चन्नी को फोन किया। उन्होंने चन्नी से कहा कि वो गुस्से में आकर कोई जल्दबाजी न करें। खड़गे ने वादा किया कि वो एक-दो दिन के अंदर चन्नी से खुद मुलाकात करेंगे और बात सुलझाएंगे।

मीटिंग में यह तय हुआ कि मीडिया के सामने सिर्फ एक ही लाइन बोलनी है कि “चन्नी साहब को सारे अधिकार दे दिए गए हैं और वो हमारी नाराजगी हाईकमान तक पहुंचाएंगे। मीटिंग खत्म होने के बाद तृप्त रजिंदर बाजवा ने मीडिया के सामने बिल्कुल यही लाइन दोहराई थी।
कैसे बची आखिरी मौके पर वडिंग की प्रधानगी…
- चार महीने से कवायद: तरनतारन उपचुनाव में राजा वडिंग ने पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह पर आपत्तिजनक बातें कहीं, वहीं से राजा वडिंग की पार्टी में खिलाफत होने लगी। फिर पार्टी तरनतारन उपचुनाव बुरे तरीके से हारी। उसके बाद विरोधी गुट के नेताओं ने राजा वडिंग को घेरना शुरू किया। सरे आम मीटिंगों में नेता राजा वडिंग की खिलाफत करने लगे। पंजाब के नेताओं का मूड भांपते हुए कांग्रेस हाईकमान ने नेतृत्व को लेकर सुगबुगाहट शुरू की। चार महीने से हाईकमान इसी एक्सरसाइज पर लगा था।
- तीन ऑब्जर्वर की कमेटी बनाई: पंजाब में गुटबाजी को खत्म करने के लिए हाईकमान ने अजय माकन के नेतृत्व में तीन ऑब्जर्वर की कमेटी बनाई। अजय माकन की कमेटी ने पंजाब के 60 से ज्यादा नेताओं को दिल्ली तलब किया और उनकी राय ली। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट बनाकर हाईकमान काे दी।
- हाईकमान ने बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया: हाईकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग व विजयइंद्र सिंगला को दिल्ली बुलाया और उनके साथ बैठक की। बैठक में सभी से राय ली गई।
- राहुल गांधी ने की वन टू वन मीटिंग: राहुल गांधी ने पंजाब के इन नेताओं से वन टू वन मीटिंग की और उसमें सभी से उनकी राय जानी। साथ ही राहुल गांधी ने सभी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की बात की। फिर केसी वेणुगोपाल ने सुखजिंदर सिंह रंधावा व चरणजीत सिंह चन्नी के साथ दिल्ली में मीटिंग की।
- चरणजीत सिंह चन्नी का नाम फाइनल हुआ: चन्नी गुटे के नेताओं का दावा है कि अजय माकन की कमेटी और सर्वे की रिपोर्ट के आधार रपर चरणजीत सिंह चन्नी का प्रधान बनना लगभग तय हो गया था। चन्नी भी आश्वस्त थे कि पंजाब कांग्रेस की बागडोर उन्हें मिलने वाली है। उसके बाद चन्नी ने पंजाब आकर राजा वडिंग व सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ सीएम भगवंत मान के खिलाफ चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
- विजय इंद्र सिंगला का नाम आया सामने: पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान ने फिर मंथन किया और उसमें चन्नी को कैंपेनिंग कमेटी का चेयरमैन और विजय सिंगला को प्रधान बनाने पर मंजूरी दी। चरनजीत चन्नी को इस फैसले से भी कोई नाराजगी नहीं थी। लेकिन जब लिस्ट जारी हुई, तो उसमें प्रधान का नाम राजा वडिंग था। जिसकी वजह से चन्नी गुट नाराज हो गया।
- हाईकमान ने क्यों बदला आखिर में फैसला: पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान को कुछ सीनियर लीडर्स का फीडबैक मिला कि पंजाब में हाल ही में जिला और ब्लॉक इकाइयों का गठन किया गया है। जिला व ब्लॉक इकाइयां राजा वड़िंग के नेतृत्व में बनी हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग उनके गुट के ही हैं। अगर अब नया प्रधान लगाया गया तो गुटबाजी के कारण ब्लॉक व जिला इकाइयों के नेता नए प्रधान को सहयोग नहीं करेंगे। जिसका खामियाजा पार्टी को ग्राउंड लेवल पर भी झेलना पड़ेगा। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने भी कहा था कि यह समय नेतृत्व परिवर्तन का नहीं है। नए प्रधान से रिजल्ट लेने के लिए कम से कम 24 महीने का वक्त चाहिए जबकि आठ महीने बाद पंजाब में चुनाव हैं।
वडिंग से चन्नी को आपत्ति क्यों
प्रधान पद पर विजय इंद्र सिंगला के नाम से चरणजीत सिंह चन्नी गुट को कोई आपत्ति नहीं है। यह बात मीटिंग में भी सामने आई। आखिर राजा वडिंग से ही उन्हें आपत्ति क्यों है, इस पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि अगर सिंगला को प्रधान बनाते तो चन्नी आश्वस्त थे कि कैंपेनिंग कमेटी के चेयरमैन वो हैं और अगर सरकार बनती है, तो वही सीएम के सबसे बड़े दावेदार होंगे, क्योंकि सिंगला हिंदू फेस हैं और पंजाब में हिंदू मुख्यमंत्री की संभावनाएं लगभग न के बराबर हैं।
राजा वडिंग प्रधान हैं, तो सरकार बनने की स्थिति में वो भी सीएम पद के लिए दावेदारी पेश करेंगे। ऐसे में जट्ट सिख होने की वजह से पार्टी उन्हें प्राथमिकता दे सकती है। वहीं दूसरी तरफ राजा वडिंग प्रधान हैं, तो वो टिकट बंटवारे में भी अहम भूमिका में होंगे और अपने गुट के ज्यादा से ज्यादा लोगों को टिकट दिलाने की कोशिश करेंगे, ताकि सरकार बनाते समय पार्टी में लॉबिंग की जा सके।

लुधियाना में राजा वडिंग गुट के पूर्व जिला प्रधान पवन दीवान लड्डू बांटते हुए।
राजा वडिंग गुट ने शुरू की लॉबिंग
चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने घर में नेताओं का जमघट लगाकर शक्ति प्रदर्शन किया तो इधर राजा वडिंग के गुट ने भी लॉबिंग शुरू कर दी। राजा वडिंग को प्रधान बनाए रखने की खुशी में जिला अध्यक्षों, हलका इंचार्जों ने लड्डू बांटने शुरू कर दिए।
लड्डू बांटने के जरिए वो हाईकमान को मैसेज देना चाहते हैं कि उनके साथ कितने नेता हैं। लुधियाना में जिला प्रधान संजय तलवाड़, पूर्व जिला प्रधान पवन दीवान, पूर्व विधायक सुरिंदर डावर समेत कई नेताओं ने राजा वडिंग को प्रधान बनाए रखने पर हाईकमान का धन्यवाद किया और लड्डू बांटे।
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