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बड़ी उम्र के व्यक्ति से शादी चाहते हैं घर वाले:बॉयफ्रेंड बालिग, शादी योग्य उम्र नहीं, अदालत के पटियाला पुलिस को दिए कस्टडी के आदेश




घरवालों द्वारा बड़ी उम्र के व्यक्ति से जबरन शादी कराने के दबाव का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा है। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नाबालिग की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि तीन दिन के भीतर नाबालिग को कस्टडी में लेकर उसे सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और उसकी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि लड़की के साथ किसी भी तरह की ज्यादती न हो और उसे आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जाए। नाबालिग ने अपनी याचिका में बताया कि उसके माता-पिता और रिश्तेदार उसे एक उम्रदराज व्यक्ति से शादी करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उसने आरोप लगाया कि इस बात को लेकर उसके साथ मारपीट भी की गई और लगातार धमकियां दी जा रही थीं। हालात इतने खराब हो गए कि उसे मजबूर होकर घर से भागना पड़ा। याचिका में यह भी सामने आया कि नाबालिग का एक बॉयफ्रेंड है, लेकिन उसकी शादी की उम्र अभी नहीं हुई है। इसके बावजूद परिवार उसकी इच्छा के खिलाफ फैसला थोपने की कोशिश कर रहा था। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि नाबालिग के अधिकारों की रक्षा करना सबसे जरूरी है और किसी भी स्थिति में उसकी इच्छा के खिलाफ शादी नहीं कराई जा सकती। इस आदेश के बाद पुलिस अब नाबालिग को सुरक्षित कस्टडी में लेकर आगे की कार्रवाई करेगी, ताकि उसे किसी भी तरह का खतरा न हो और उसके भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके। अब 3 पॉइंट में जानिए पूरा मामला 1. शिकायतकर्ता 16 साल की है, जबकि उसका बॉयफ्रेंड 19 साल का है। वह पिछले कई साल से एक-दूसरे को पसंद करते हैं। 2. मां-बाप को यह रिश्ता पसंद नहीं है, जिस कारण वे किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शादी करना चाहते हैं, जबकि शिकायतकर्ता अभी शादी नहीं करना चाहती है। 3. हाईकोर्ट के 2022 के आदेश के अनुसार सुरक्षा देने के अदालत ने आदेश दिए हैं, जिसमें पुलिस को पीड़िता को कस्टडी में लेकर सात दिन में सुरक्षित जगह शिफ्ट करना होगा। यह है 2022 का मामला
2022 में हरियाणा का एक मामला सामने आया था, जिसमें 16 से 17 साल के बीच की लड़कियों की माता-पिता की मर्जी के खिलाफ किसी बड़ी उम्र के व्यक्ति से शादी करवाने की कोशिश की गई थी। इस मामले में हाईकोर्ट की तरफ से तर्क दिया गया था कि 18 साल से कम उम्र की कोई लड़की किसी व्यक्ति के साथ अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप की हकदार नहीं है, क्योंकि नाबालिग के साथ यौन संबंध अपराध है। लेकिन हिंदू कानून के तहत नाबालिग की शादी नही मानी जा सकती है और माता-पिता ही उसके अभिभावक होते हैं। कोई दूसरा व्यक्ति उसकी कस्टडी नहीं ले सकता। ऐसे मामलों में नाबालिग की कस्टडी चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को दी जा सकती है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि ऐसे मामलों में नाबालिग की सुरक्षा सुनिश्चित करें, तीन दिनों के भीतर कस्टडी लें और सात दिनों के अंदर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए।



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